इससे पहले वर्ष 2009 में पीसा परीक्षा में कुल 74 देशों ने भाग लिया था, जिसमें भारत का 72वां रैंक आया था। वर्ष 2009 की पीसा परीक्षा में हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडू के चार सौ स्कूलों के 16 हजार छात्र शामिल हुए थे। सबसे निम्म प्रदर्शन के चलते यूपीए सरकार ने पीसा परीक्षा का बायकॅाट कर दिया था। 2015 में मोदी सरकार ने परीक्षा में भाग लेने का फिर से फैसला लिया।
एक हजार अंकों की परीक्षा तीन से साढ़े तीन घंटे में होगी
पीसा 2021 परीक्षा एक हजार अंकों की होगी। परीक्षा तीन, सवा तीन या साढ़े तीन घंटों की हो सकती है। समय को लेकर बदलाव होते रहते हैं। इस दौरान एक घंटे की लिखित परीक्षा में स्कूल, माहौल, पेरेंट्स, पढ़ाई-रहने आदि की स्थिति का जायजा लिया जाता है। जबकि दो घंटे की परीक्षा में 33-33 फीसदी के आधार पर रीडिंग, मैथ्स व साइंस विषय को बांटा जाता है। इसे तीन वर्गों में विभाजित किया जाता है। इसमें रीडिंग -साइंस, साइंस-मैथ्स होता है। छात्र को इन तीन वर्गों में से किसी दो पर परीक्षा में सवाल पूछे जा सकते हैं। हालांकि किससे क्या पूछा जाएगा, इसकी किसी को जानकारी नहीं होगी।
रट्ट नहीं, टेलेंट से सफलता
पीसा 2021 परीक्षा में रट्टा मारकर तैयारी करने वाले छात्र सफल नहीं हो सकते हैं। क्योंकि परीक्षा में बहुविकल्पीय प्रश्न नहीं होते है। इसमें एक पैरा दिया जाएगा। छात्र उसी में से बार-बार पढने के बाद उत्तर निकाल पाएंगे। यानी जो छात्र नालेज के साथ टैलेंट रखता होगा वह पास हो जाएगा। यह परीक्षा कान्सेप्ट पर आधारित होगी।