स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ शोधकर्ता टीम के सदस्य मुंबई में इसका परीक्षण कर रहे हैं। मुंबई में एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से एकत्र किए गए अपशिष्ट जल के साथ जब सेंसर का परीक्षण किया गया था, जिसमें SARS-Cov-2 राइबोन्यूक्लिक एसिड (RNA) मिला हुआ था। शोधकर्ताओं ने पाया कि सेंसर 10 पिकोग्राम प्रति माइक्रोलीटर जितने सूक्ष्म स्तर पर भी वायरस की आनुवंशिक सामग्री का पता लगाने में सक्षम था।
अन्य वायरस खोजने में भी सक्षम
आईआईटी बॉम्बे के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सिद्धार्थ तल्लूर के अनुसार, यह तकनीक सिर्फ सार्स-कोव-2 पर लागू नहीं है, बल्कि इसे किसी अन्य वायरस पर भी आजमाया जा सकता है। निकट समय में हम इसकी जांच सटीकता बढ़ाने के लिए ध्यानपूर्वक काम कर रहे हैं।
आरटी-पीसीआर टेस्ट पर निर्भरता कम होगी
हाल ही में जर्नल, सेंसर्स एंड एक्चुएटर्स बी: केमिकल में प्रकाशित शोध के अनुसार, यह रियल टाइम क्वांटेटिव पीसीआर परीक्षणों के लिए आवश्यक महंगे रसायनों और प्रयोगशाला के बुनियादी ढांचे की आवश्यकता को समाप्त कर सकता है। क्योंकि, इस सेंसर का उपयोग पोर्टेबल उपकरणों के साथ किया जा सकता है, जो सार्स-सीओवी-2 वायरस का पता लगाने के लिए मानक पोलीमरेज चेन रिएक्शन (PCR) परीक्षण तकनीक का उपयोग करता है।