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आईआईटी बॉम्बे : ब्रिटिश यूनिवर्सिटी के सहयोग से बनाया सेंसर, सीवेज के पानी में भी खोज लेगा कोरोना

Thu, 10 Jun 2021 06:50 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

भारतीय और ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने एक ऐसा सेंसर विकसित किया जो सीवेज के पानी में कोरोना वायरस की मौजूदगी का पता लगा सकता है। फिलहाल, मुंबई में इसका परीक्षण किया जा रहा है। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay
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विस्तार
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कोरोना महामारी के खिलाफ जंग में अब भारत और ब्रिटेन दोनों देश साथ मिलकर लड़ाई लड़ रहे हैं। इसी क्रम में भारतीय और ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने एक ऐसा सेंसर विकसित किया जो सीवेज के पानी में कोरोना वायरस की मौजूदगी का पता लगा सकता है। फिलहाल, मुंबई में इसका परीक्षण किया जा रहा है।  

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दरअसल, भारत और ब्रिटेन के वैज्ञानिकों के द्वारा संयुक्त तौर पर विकसित किए गए सेंसर के जरिये स्वास्थ्य विशेषज्ञ अपशिष्ट जल यानी सीवेज के पानी में से कोरोना वायरस संक्रमण के लिए जिम्मेदार और इसके कारक सार्स - सीओवी - 2 (SARS-CoV-2) वायरस के अंशों को पहचान सकता है। इस सेंसर उपकरण के जरिये स्वास्थ्य विशेषज्ञ संबंधित क्षेत्र में कोरोना संक्रमण के स्तर का पता लगा सकेंगे।  

दोनों देशों के वैज्ञानिकों द्वारा संयुक्त तौर पर तैयार इस सेंसर की लागत भी कम है।  जिससे इसका उपयोग भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश में आसानी से किया जा सकता है। इस सेंसर को ब्रिटेन में स्ट्रेथक्लाइड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं और भारत में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी बॉम्बे के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित किया गया है। 
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मुंबई के सीवेज प्लांट में हो रहा परीक्षण 

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स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ शोधकर्ता टीम के सदस्य मुंबई में इसका परीक्षण कर रहे हैं। मुंबई में एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से एकत्र किए गए अपशिष्ट जल के साथ जब सेंसर का परीक्षण किया गया था, जिसमें SARS-Cov-2 राइबोन्यूक्लिक एसिड (RNA) मिला हुआ था। शोधकर्ताओं ने पाया कि सेंसर 10 पिकोग्राम प्रति माइक्रोलीटर जितने सूक्ष्म स्तर पर भी वायरस की आनुवंशिक सामग्री का पता लगाने में सक्षम था। 

अन्य वायरस खोजने में भी सक्षम
 

आईआईटी बॉम्बे के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सिद्धार्थ तल्लूर के अनुसार, यह तकनीक सिर्फ सार्स-कोव-2 पर लागू नहीं है, बल्कि इसे किसी अन्य वायरस पर भी आजमाया जा सकता है। निकट समय में हम इसकी जांच सटीकता बढ़ाने के लिए ध्यानपूर्वक काम कर रहे हैं। 

आरटी-पीसीआर टेस्ट पर निर्भरता कम होगी
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हाल ही में जर्नल, सेंसर्स एंड एक्चुएटर्स बी: केमिकल में प्रकाशित शोध के अनुसार, यह रियल टाइम क्वांटेटिव पीसीआर परीक्षणों के लिए आवश्यक महंगे रसायनों और प्रयोगशाला के बुनियादी ढांचे की आवश्यकता को समाप्त कर सकता है। क्योंकि, इस सेंसर का उपयोग पोर्टेबल उपकरणों के साथ किया जा सकता है, जो सार्स-सीओवी-2 वायरस का पता लगाने के लिए मानक पोलीमरेज चेन रिएक्शन (PCR) परीक्षण तकनीक का उपयोग करता है। 
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