बता दें कि यह अनुमति केवल चुनिंदा शाखाओं के लिए ही दी गई है। जिसमें ज्यादातर पाठ्यक्रम कंप्यूटर विज्ञान के हैं। इसके बाद इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग और सूचना प्रौद्योगिकी के हैं।
उपराष्ट्रपति सचिवालय ने इस पर खुशी जताते हुए ट्वीट किया है। उन्होंने ट्वीट में लिखा है कि मुझे आशा है कि अन्य इंजीनियरिंग कॉलेज तथा अन्य तकनीकी शिक्षा संस्थान भी जल्द ही क्षेत्रीय भाषाओं में पाठ्यक्रम शुरू करेंगे।
बता दें कि यह पहला वर्ष है जब एआईसीटीई ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के प्रावधानों के अनुरूप जहां तक संभव हो अपनी मातृभाषा में शिक्षा देने का प्रयास किया है। इंजीनियरिंग कॉलेजों को 11 क्षेत्रीय भाषाओं (हिंदी, मराठी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, गुजराती, मलयालम और बंगाली, असमिया, पंजाबी और उड़िया) में बी.टेक कार्यक्रमों की पेशकश करने की अनुमति दी है।
गौरतलब है कि पिछले साल नवंबर में, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने घोषणा की थी कि वह 2021-22 शैक्षणिक वर्ष से क्षेत्रीय भाषाओं में तकनीकी शिक्षा, विशेष रूप से इंजीनियरिंग पर जोर देगा। मंत्रालय ने यह भी संकेत दिया था कि कुछ शीर्ष इंजीनियरिंग स्कूल जैसे IIT और NIT इसे लागू करने वाले पहले लोगों में शामिल हो सकते हैं।