आईआईटी दिल्ली, यूएई में तो आईआईटी मद्रास, इन देशों में खोलेगी कैंपस
इसके साथ ही आईआईटी के वैश्विक विस्तार के लिए केंद्र द्वारा गठित समिति ने अपनी सिफारिश में सुझाव दिया कि विदेश में आईआईटी शुरू करने का स्वामित्व विशेष उच्च शिक्षण संस्थान (एचईआई) यानी संबंधित आईआईटी के पास ही होना चाहिए। सूत्र ने कहा कि कई आईआईटी को मध्य पूर्व और दक्षिण एशियाई देशों से अपने परिसरों को स्थापित करने के लिए अनुरोध प्राप्त हो रहे हैं। जहां आईआईटी, दिल्ली; यूएई में एक कैंपस स्थापित करने पर विचार कर रही है, वहीं आईआईटी, मद्रास; श्रीलंका, नेपाल और तंजानिया में विकल्प तलाश रहा है।
इंटरनेशनल आईआईटी में लागू हो सेमेस्टर प्रणाली
सूत्र ने कहा कि मौजूदा आईआईटी से विदेश में खुलने वाले संस्थान में फैकल्टी की प्रतिनियुक्ति का प्रावधान होना चाहिए। यह नए संस्थान के शुरुआती वर्षों में महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां के फैकल्टी के अनुभव से काफी कुछ प्राप्त कर सकते हैं। विदेशों में आईआईटी सेमेस्टर प्रणाली का पालन कर सकते हैं और सेमेस्टर की शुरुआत और समाप्ति तिथियां अकादमिक कैलेंडर के अनुरूप हो सकती हैं। वहीं, पैनल ने सिफारिश की है कि विशिष्ट स्थान के आधार पर संस्थान की स्थापना के एक से अधिक मॉडल हो सकते हैं। जैसे- किसी विदेशी प्रतिष्ठित मेजबान विश्वविद्यालय के साथ सहयोग को प्राथमिकता दी जा सकती है।
विदेश में शुरू करने का दूसरी बार हो रहा प्रयास
केंद्र ने इस साल की शुरुआत में आईआईटी काउंसिल की स्थायी समिति के अध्यक्ष डॉ के राधाकृष्णन की अध्यक्षता में 17 सदस्यीय समिति का गठन किया था। पैनल ने IIT, NIT या IISER जैसे संस्थानों की श्रृंखला स्थापित किए जाने का सुझाव दिया है, क्योंकि वर्तमान आईआईटी अधिनियम देश के बाहर आईआईटी खोलने की अनुमति नहीं देता। यह दूसरी बार है जब आईआईटी, दिल्ली विदेशों में विस्तार करने की कोशिश कर रहा है। 2014 में इस परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था।