सूत्रों का कहना है कि आईआईटी में बीटेक के पहले सेमेस्टर में ही करीब तीन हजार छात्र फेल हो जाते हैं। उन्हें आईआईटी दोबारा परीक्षा का मौका तो देता है, पर तनाव के चलते कुछ ही छात्र सफल हो पाते हैं। ऐसे छात्र आईआईटी से बाहर निकाले जाने के बाद कहीं दाखिला नहीं ले पाते। तनाव के कारण दर्जनों छात्र हर साल आत्महत्या कर लेते हैं।
आईआईटी प्रबंधन इसी सत्र से ऐसे छात्रों को बीएससी इंजीनियरिंग के दूसरे सेमेस्टर में शिफ्ट करने की तैयारी कर रहा है। इस डिग्री प्रोग्राम में छह सेमेस्टर की पढ़ाई होगी। अगर काउंसिल बैठक में सभी 23 आईआईटी इस बात पर सहमत होते हैं, तो यह योजना इसी सत्र लागू हो जाएगी।
इसके अलावा आरक्षित वर्ग के कमजोर छात्रों को स्कॉलरशिप के साथ एक साल का विस्तार देने का प्रस्ताव भी आएगा। संस्थानों की रैंकिंग गिरने के मामले पर भी चर्चा होगी।
ये भी पढ़ें : UGC और AICTE हो जाएंगे खत्म? कैबिनेट के सामने आने वाला है विधेयक
दो सालों में 2461 छात्रों ने पढ़ाई छोड़ी
मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने हाल में ही आईआईटी के संबंध में एक रिपोर्ट जारी की थी। बताया गया था कि पिछले दो सालों में आईआईटी के 2461 छात्रों ने अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ दी। पाठ्यक्रम समझ नहीं आना, तनाव और नौकरी इसका मुख्य कारण था।
ये भी पढ़ें : GATE 2020: फिर बढ़ गया है आवेदन का समय, जानें नई तारीख