पिंगली वेंकैया के बारे में जानें सबकुछ-
- पिंगली वेंकैया का जन्म 2 अगस्त, 1876 को हुआ था।
- 19 साल की उम्र में वे "ब्रिटिश आर्मी" से जुड़े और अफ्रीका में एंग्लो-बोएर जंग का हिस्सा बन गए।
- इसी जंग में पिंगली की मुलाकात महात्मा गांधी से हुई।
- इन्होंने भटाला पेनमरू और मछलीपट्टनम से शुरुआती शिक्षा ग्रहण की।
- मात्र 19 साल की उम्र मेें ही, इन्होंने सेना की नौकरी कर ली। इसी दौरान इनकी पोस्टिंग दक्षिण अफ्रीका में हुई।
- बता दें कि ये 1899 से 1902 के दौरान दक्षिण अफ्रीका के "बायर" युद्ध का भी हिस्सा रह चुके हैं।
- पिंगली गांधी के विचारों से बेहद प्रभावित थे।
- सेना की नौकरी के बाद वे मुंबई में रेलवे में गार्ड की नौकरी करने लगे।
- कुछ समय बाद यह भी नौकरी छोड़ दी क्योंकि मद्रास में उस वक्त प्लेन नामक महामारी फैल गई, जिसकी वजह से काफी लोग मर गए।
- बेवजह हुई मौतों से उनका मन विचलित हो गया और गार्ड की नौकरी छोड़ पिंगली ने मद्रास में प्लेग रोग निर्मूलन इंस्पेक्टर की नौकरी कर ली।
- पिंगली वेंकैया को "झंडा वेंकैया" के नाम भी जाना जाता है।
- पिंगली वेंकैया का निधन 4 जुलाई, 1963 को हुआ।
ऐसे तैयार हुआ तिरंगा
- पिंगली वेंकैया के दिमाग में 1916 में झंडा बनाने का ख्याल आया।
- एस.बी. बोमान और उमर सोमानी ने भी इस ख्याल की सराहना की।
- उस वक्त तीनों ने मिलकर नेशनल फ्लैग मिशन की स्थापना की।
- उन्होंने अपने मिशन में गांधी जी की भी सलाह ली।
- गांधी जी ने उस वक्त कहा था कि यदि संपूर्ण भारत को एक सूत्र में बांधना है तो तिरंगे के बीच में अशोक चक्र होना चाहिए।
- उस वक्त तिरंंगे के रंग को लेकर वेंकैया काफी विवादों में रहें।
- 1947 में कांग्रेस के सामने राष्ट्रीय ध्वज को क्या रूप दिया जाए, ये प्रश्न एक पहेली के रूप में खड़ा हो गया।
- इसके लिए डॉ. राजेंद्र प्रसाद के नेतृत्व में केमटी बनी। बता दें कि कमेटी बनाने के तीन हफ्ते बाद यानी 14 अगस्त को इस कमेटी ने सिफारिश की।
- सिफारिश थी अखिल भारतीय कांग्रेस के ध्वज को ही राष्ट्रीय ध्वज के रूप में घोषित किया जाए।
- सिफारिश स्वीकार की गई और 15 अगस्त 1947 को तिरंगा भारत की आजादी का प्रतीक बन गया।
- चूंकि पिंगली वेंकैया ने तिरंगा डिजाइन किया था इसलिए भारत सरकार ने उनके नाम पर डाक टिकट जारी किया।