कर्नाटक के स्कूल-कॉलेजों में हिजाब पहनकर प्रवेश को लेकर मचे बवाल के बीच आज हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं और सरकार दोनों के हीं वकीलों ने मामले पर अपनी-अपनी दलीलें रखी। इसके बाद हाईकोर्ट ने कहा की वह कल बुधवार 16 फरवरी, 2022 को फिर से मामले पर सुनवाई करेगा।
दक्षिण अफ्रीकी अदालत का हवाला
याचिकर्ताओं के वकील देवदत्त कामत ने दक्षिण अफ्रीका की अदालत के फैसले का जिक्र करते हुए बताया कि दक्षिण भारत की एक लड़की को स्कूल में नाक की बाली पहनने की इजाजत दी गई थी। फैसले में यह भी कहा गया कि अगर अन्य विद्यार्थी भी अपने संस्कृति का पालन करने के लिए प्रोत्साहित होते हैं, तो यह डरने की नहीं बल्कि जश्न मनाने की बात है।
देश में सकारात्मक धर्मनिरपेक्षता
वकील देवदत्त कामत ने कहा कि सार्वजनिक रूप से अपने धर्म या संस्कृति का प्रदर्शन डराने वाली परेड नहीं बल्कि विविधता का एक उत्सव है जो देश को समृद्ध करेगा। अधिवक्ता देवदत्त कामत ने आगे कहा कि भारत का संविधान सकारात्मक धर्मनिरपेक्षता का पालन करता है न कि तुर्की की तरह नकारात्मक धर्मनिरपेक्षता का। उन्होंने आगे कहा कि भारत की धर्मनिर्पेक्षता यह सुनिश्चित करती है कि सभी धर्मों के अधिकारों की रक्षा की जाए।
इससे पहले सोमवार को हाईकोर्ट ने मामले पर दलीलें सुनने के बाद सुनवाई को मंगलवार तक के लिए टाल दिया था। हिजाब पर प्रतिबंध के खिलाफ अपील करने वाली छात्राओं के वकील देवदत्त कामत ने कहा था कि हिजाब पर प्रतिबंध का सरकारी आदेश गैर जिम्मेदाराना है। उन्होंने कहा था कि हिजाब पर प्रतिबंध का सरकार का आदेश संविधान के अनुच्छेद 25 का उल्लंघन है और यह कानूनन वैध नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 25 में नागरिकों को धार्मिक मान्यताओं के पालन की आजादी दी गई है।
कल से खुलेंगे प्री-यूनिवर्सिटी और डिग्री कॉलेज
सोमवार को कर्नाटक सरकार ने राज्य में प्री-यूनिवर्सिटी और डिग्री कॉलेजों को फिर से खोलने का फैसला जारी कर दिया है। बुधवार 16 फरवरी से से इन कॉलेजों को फिर से खोल दिया जाएगा। राज्य के प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्रा बीसी नागेश ने इस बात की जानकारी दी है।
दसवीं तक के स्कूल खुले
इससे पहले कर्नाटक सरकार ने राज्य में हाई स्कूलों को सोमवार 14 फरवरी, 2022 से वापस खोल दिया है। हालांकि, हाईकोर्ट की रोक के बावजूद उडुपी में कई स्कूल छात्राएं हिजाब और बुर्का पहनकर स्कूल जाती दिखीं थी। कई जगहों पर हिजाब पहनी छात्राओं को कक्षा में प्रवेश नहीं दिया गया, इसे लेकर विवाद भी देखने को मिला।
कुछ स्थानों पर परीक्षाओं का बहिष्कार
कर्नाटक में कुछ स्थानों पर लड़कियों ने प्री परीक्षाओं का बहिष्कार किया है तो कहीं अभिभावक ही विवाद के बीच बच्चों को स्कूल भेजने से कतराने लगे हैं। उडुपी के पकिरनगर में कई अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है। उनका कहना है कि स्कूल में हिजाब पहनने पर प्रतिबंध लगने के बाद से ही वह उन्हें स्कूल नहीं भेज रहे हैं।