क्या काम करेगा नया रेगुलेटर?
नए उच्च शिक्षा आयोग को तीन मुख्य भूमिकाएं सौंपी जाएंगी। जिसमें रेगुलेशन, एक्रेडिटेशन और प्रोफेशनी स्टैंडर्ड तय करना शामिल है। विनियमन (रेगुलेशन) में यह उच्च शिक्षा संस्थानों का संचालन, कोर्स संरचना और नियम तय करेगा। प्रत्यायन (एक्रेडिटेशन) में कॉलेजों विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता का मूल्यांकन और रैंकिंग करेगा। व्यावसायिक मानक (प्रोफेशनल स्टैंडर्ड ) में यह शिक्षण, तकनीकी शिक्षा और शिक्षक प्रशिक्षण के लिए मानक निर्धारित करेगा।
जरूरी बात की मेडिकल और लॉ शिक्षा इस नए रेगुलेटर के दायरे से बाहर रहेंगी। हालांकि एनईपी में फंडिंग को भी एक अहम स्तंभ माना गया था, लेकिन फिलहाल फंडिंग की ऑटोनॉमी संबंधित मंत्रालयों के पास ही रहेगी। इसके बाद के चरण में आयोग के तहत लाने पर फैसला लिया जा सकता है।
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च शिक्षा में कई नियामक संस्थाओं के चलते नियमों में टकराव, अनुमोदन प्रक्रियाओं में देरी, गुणवत्ता मूल्यांकन में असंगतियां, शिक्षक प्रशिक्षण के प्रति अलग-अलग दिशानिर्देश जैसी समस्याएं आती थीं। इस बदलाव से एकल रेगुलेटर इस सभी मुद्दों पर समाधान लाएगा।