इसलिए लिया गया फैसला, Reservation Policy in PhD Admission
गौरतलब है कि गुजरात उच्च न्यायालय में IIM अहमदाबाद की मौखिक टिप्पणियों के बाद यह निर्णय आया है, जिसमें कहा गया था कि 2025 से आरक्षण मिलेगा।
इस कदम के बाद यदि कोई उम्मीदवार अनुसूचित जाति (एससी)/अनुसूचित जनजाति (एसटी)/विकलांग व्यक्ति (पीडब्ल्यूडी)/गैर-क्रीमी अन्य पिछड़ा वर्ग (एनसी-ओबीसी)/आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) से है तो न्यूनतम पात्रता वाली डिग्री में 5 प्रतिशत अंकों की छूट दी जाएगी।
दायर हुई थी याचिका, Reservation in IIM Ahmedabad
Global IIM Alumni Network ने गुजरात उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की, जिसमें IIMA के पीएचडी कार्यक्रमों में आरक्षण लागू करने की मांग की गई थी। जनहित याचिका में कहा गया है कि 1971 में शुरू हुए आईआईएमए में पीएचडी कार्यक्रम में आरक्षण न देना संवैधानिक प्रावधानों, केंद्रीय शैक्षिक संस्थान (प्रवेश में आरक्षण) या सीईआरए अधिनियम और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मानदंडों का “घोर उल्लंघन” है।
आईआईएम अहमदाबाद पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया के अनुसार, प्रबंधन में डॉक्टरेट कार्यक्रम में आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को कॉमन एडमिशन टेस्ट के बदले में एक मानक परीक्षा देनी होती है।