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Ireland Racism Row: फूड बैंक में कतारों से भड़की नफरत! आयरलैंड में भारतीय छात्रों पर नस्लीय हमले; जानिए मामला

Tue, 24 Feb 2026 09:41 AM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Ireland Food Bank: आयरलैंड में एक फूड बैंक के बाहर लगी लंबी कतार की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया। तस्वीर में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र नजर आने पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर नस्लीय टिप्पणियां और तीखी बहस तेज हो गई है।
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Galway university - फोटो : https://www.universityofgalway.ie/about-us/
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विस्तार
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Galway university: 21 फरवरी को आयरिश टाइम्स ने एक खबर प्रकाशित की। इस खबर में बताया गया कि गॉलवे विश्वविद्यालय के फूड बैंक में खाने की कमी हो गई है। हालात ऐसे हैं कि हर हफ्ते सैकड़ों छात्रों को खाना देने से मना करना पड़ रहा है। इस खबर के साथ एक तस्वीर भी छपी थी। उसी तस्वीर को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद शुरू हो गया।
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विवाद की वजह यह थी कि तस्वीर में फूड बैंक के बाहर लंबी कतार दिखाई दे रही थी, और उस कतार में ज्यादातर भारतीय (देसी) छात्र नजर आ रहे थे। इसके बाद लोगों के बीच बहस छिड़ गई। कुछ लोग सवाल उठाने लगे कि क्या विदेशी छात्र जो शायद आर्थिक रूप से मजबूत परिवारों से आते हैं - उन सुविधाओं का लाभ लें जो असल में जरूरतमंद और गरीब छात्रों की मदद के लिए बनाई गई हैं?

वहीं दूसरी तरफ कुछ लोगों का कहना है कि हर विदेशी छात्र अमीर नहीं होता। कई छात्र लोन लेकर या पार्ट-टाइम काम करके अपनी पढ़ाई पूरी करते हैं, इसलिए अगर उन्हें सच में जरूरत है तो उन्हें भी मदद मिलनी चाहिए। यानी यह मामला सिर्फ एक तस्वीर से शुरू हुआ, लेकिन अब यह जरूरत, अधिकार और जिम्मेदारी पर बड़ी बहस बन चुका है।
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दरअसल यह तस्वीर स्पेयर स्टूडेंट पैंट्री के बाहर की थी। यह पैंट्री छात्रों को रियायती या मुफ्त भोजन उपलब्ध कराती है। देश में बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन संकट के कारण यहां मांग तेजी से बढ़ी है। रिपोर्ट में बताया गया था कि पिछले साल लगभग पांच लाख यूरो का भोजन वितरित किया गया। हर सप्ताह सैकड़ों छात्रों को भारी मांग के कारण लौटाना पड़ता है। लेकिन सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने तस्वीर के उस हिस्से को निशाना बनाया, जिसमें दक्षिण एशियाई मूल के छात्र दिख रहे थे।

सोशल मीडिया पर भड़की नस्लीय टिप्पणियां

तस्वीर वायरल होते ही एक्स सहित अन्य प्लेटफॉर्म पर कई यूजर्स ने भारतीय छात्रों को निशाना बनाते हुए आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। कुछ ने विदेशी छात्रों को दोषी ठहराया। कुछ ने निर्वासन की मांग की। बिना किसी प्रमाण के यह भी कहा गया कि विदेशी छात्र मुफ्त सुविधाओं का दुरुपयोग कर रहे हैं। इन टिप्पणियों ने भारतीय समुदाय में चिंता बढ़ा दी है।

रिपोर्ट में क्या कहा गया था?

रिपोर्ट में कहीं भी किसी खास देश या समुदाय का जिक्र नहीं था। स्पेयर पैंट्री की शुरुआत पर्यावरण पहल के रूप में हुई थी। डोनेगल के छात्र एडम मुलिंस ने इसे शुरू किया था। सुपरमार्केट से बचा हुआ भोजन छात्रों तक पहुंचाया जाता है। अब विश्वविद्यालय और छात्र संघ भी इसे समर्थन दे रहे हैं। कई छात्रों ने कहा कि महंगाई के कारण उनके लिए पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो गया है। पैंट्री उन्हें राहत देती है।

बढ़ती नस्लीय हिंसा की पृष्ठभूमि

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब आयरलैंड में भारतीयों पर शारीरिक हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं। पिछले साल डबलिन में एक भारतीय व्यक्ति पर हमला हुआ था। उसे चाकू मारा गया और लूटा गया। एक अन्य मामले में 32 वर्षीय भारतीय मूल के व्यक्ति पर छह युवकों ने हमला किया, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं। इन घटनाओं को संभावित हेट क्राइम माना गया।
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भारतीय दूतावास की एडवाइजरी

हाल ही में आयरलैंड स्थित भारतीय दूतावास ने नागरिकों को सावधानी बरतने की सलाह दी थी। दूतावास ने कहा कि हाल के महीनों में भारतीयों पर हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं। नागरिकों को खासकर सुनसान इलाकों और देर रात बाहर जाने से बचने को कहा गया। साथ ही आपात संपर्क विवरण भी साझा किए गए।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि पैंट्री सभी जरूरतमंद छात्रों के लिए है। इसमें राष्ट्रीयता के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता। विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई और आर्थिक दबाव के समय में गलत सूचनाएं तेजी से फैलती हैं। इससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता है।

महंगाई संकट और असली मुद्दा

आयरलैंड में जीवन-यापन की लागत लगातार बढ़ रही है। किराया, भोजन और ऊर्जा खर्च छात्रों पर भारी पड़ रहे हैं। रिपोर्ट का मकसद इसी संकट को उजागर करना था। लेकिन तस्वीर के एक हिस्से को आधार बनाकर भड़काऊ अभियान चलाया गया। इससे स्पष्ट है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर गलत धारणाएं किस तरह सामाजिक विभाजन को बढ़ा सकती हैं।

सरकार और सामाजिक संगठनों के सामने अब चुनौती है कि वे नफरत फैलाने वाली सामग्री पर सख्ती करें और समुदायों के बीच भरोसा बनाए रखें। भारतीय समुदाय ने भी अपील की है कि अफवाहों पर विश्वास न किया जाए और शांति बनाए रखी जाए।
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