सेंट्रल सुपीरियर सर्विस (सीएसएस) की लिखित परीक्षा 2020 में कुल 18,553 अभ्यर्थियों शामिल हुए थे। लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर केवल 221 अभ्यर्थियों का ही चयन किया गया था। चयनित अभ्यर्थियों में महिलाओं/लड़कियों की संख्या 79 थी। जिसमें सना चयनित होने वाली पहली हिंदू लड़की बन गईं हैं। बता दें इस बार परीक्षा में टॉप करने वाली भी एक महिला ही हैं, जिनका नाम माहीन हसन हैं।
सिंध प्रांत के शिकारपुर जिले में स्थित कस्बा चक में रहने वाली सना बताती हैं कि सिंध में हिंदुओं की आबादी तकरीबन 20 लाख है। पारंपरिक रूप से इस क्षेत्र की लड़कियां स्वास्थ्य व शिक्षा में नौकरियां करती आई हैं। इसी परंपरा को निभाते हुए मैंने भी चांडका मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने के बाद सिविल अस्पताल ज्वॉइन कर लिया था। साथ ही सिंध इंस्टीट्यूट ऑफ यूरोलॉजी एंड ट्रांसप्लांट से यूरोलॉजी में एफसीपीएस कर रही थी।
सरकारी अस्पतालों में मरीजों की परिस्थितियों को देखकर रोना आने लगा। एक डॉक्टर होने के बावजूद मैं उनके लिए कुछ नहीं कर पा रही थी। लेकिन ब्यूरोक्रेसी में इसके विपरीत आपको इन समस्याओं को हल करने के कई अवसर मिलते हैं। इसलिए 2019 में मैंने सीएसएस परीक्षा पास करने का लक्ष्य तय किया। लेकिन माता-पिता इसके लिए तैयार नहीं थे। मैंने अपनी मां को मनाया और अपने सपनों को पूरा करने के लिए एक मौका मांगा।
मैंने अपने मोबाइल से सभी सोशल मीडिया अकाउंट हटा दिए। मोबाइल में ही सारे ई-बुक्स डाउनलोड कर ली। कहीं भी जाती थी तो रास्ते में बुक खोलकर पढ़ने लग जाती थी। सुबह आठ बजे से रात के आठ बजे तक अस्पताल में नौकरी करने के बाद पढ़ाई करती थी। दिन में मुश्किल से 5-6 घंटे की नींद कर कर पाती थी।
पहले ही प्रयास में मैंने लिखित परीक्षा पास कर ली। इस दौरान सोशल मीडिया पर मेरी तस्वीर वायरल होने लगी। सब लोग मेरी मेहनत को सराहने लगे। यह सब देख माता-पिता खुश हो गए और साक्षात्कार के लिए मुझे प्रोत्साहित किया और मैंने दोनों परीक्षाएं पास कर लीं।
अगर आपने कोई काम ठान लिया है तो उसे करना ही है। फिर आप कोई बहाना नहीं बना सकते हैं। आपकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी की आप अपनी मेहनत को कितनी तवज्जो देते हैं। आप उसके लिए खुद को कितना समर्पित कर सकते हैं।