पहली बार लागू हुई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली
धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि पहली बार सीबीएसई ने डिजिटल मूल्यांकन यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली लागू की है। इसका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और प्रक्रिया को छात्र-केंद्रित बनाना है।
उन्होंने कहा कि अब छात्र अपनी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं देख सकते हैं, अंकों की जांच कर सकते हैं और किसी भी त्रुटि पर सवाल उठा सकते हैं। अब तक लगभग 4 लाख छात्र अपनी उत्तर पुस्तिकाएं एक्सेस कर चुके हैं, जिनमें करीब 11 लाख कॉपियां शामिल हैं।
आईआईटी और पीएसयू बैंकों को भी जोड़ा गया
शिक्षा मंत्री ने बताया कि इस पूरी तकनीकी प्रक्रिया की निगरानी के लिए आईआईटी कानपुर और आईआईटी मद्रास जैसी प्रमुख संस्थाओं को शामिल किया गया है। वहीं भुगतान प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए SBI, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक के पेमेंट गेटवे को जोड़ा गया है।
'कुछ गड़बड़ियां हुईं हैं, जिनका दायित्व मैं लेता हूं': प्रधान
धर्मेंद्र प्रधान ने माना कि प्रक्रिया में कुछ विसंगतियां सामने आई हैं और सरकार इसकी जिम्मेदारी स्वीकार करती है। उन्होंने कहा, 'पहली बार देश में सीबीएसई ने ओएसएम प्रक्रिया का इस्तेमाल किया। उसमें कुछ विसंगतियां ध्यान में आ रही हैं, जिनका मैं दायित्व लेता हूं, उसको ठीक किया जाएगा, उसका उपाय लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सभी समस्याओं को दूर करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे और हर स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी छात्र की शिकायत या सवाल को अनसुलझा नहीं छोड़ा जाएगा।
राहुल गांधी के आरोपों पर क्या बोले शिक्षा मंत्री?
सीबीएसई परीक्षा मूल्यांकन में कथित गड़बड़ियों को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान पर भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सीबीएसई इस मामले पर पहले ही अपना जवाब दे चुका है और पूरी प्रक्रिया भारत सरकार की खरीद नीति के अनुसार हुई है।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर कोई अनियमितता पाई जाती है तो किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा, 'मैं सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि अगर कोई गड़बड़ी सामने आती है तो सख्त कार्रवाई होगी।'