फीस बढ़ोतरी का मामला कोर्ट में लंबित
वर्ष 2016 में हाईकोर्ट की डबल बेंच ने एक आदेश दिया था कि सरकारी जमीन पर बने स्कूल बिना मंजूरी के फीस नहीं बढ़ाएंगे। पिछले वर्ष मार्च में शिक्षा निदेशालय ने नए सत्र को लेकर एक आदेश जारी किया था जिसमें स्कूलों को फीस बढ़ाने से पहले मंजूरी लेने के निर्देश थे। यह मामला कोर्ट में चला गया और सिंगल बेंच द्वारा विभाग के फीस बढ़ाने से रोकने के आदेश पर अंतरिम स्टे लगा दी गई।
बढ़ी फीस देने से मना करने पर करते है प्रताड़ित
अपराजिता ने बताया कि बढ़ी फीस न देने पर बच्चों को मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया जाता है। जिन बच्चों के अभिभावकों ने पिछले वर्ष की बढ़ी फीस नहीं दी उन बच्चों के रिजल्ट रोक दिया। दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग से लेकर शिक्षा निदेशालय को इस संबंध में शिकायत भी दी गई।
फीस रेगुलेट करने का प्रस्ताव हो रहा तैयार
शिक्षा निदेशालय के एक अधिकारी ने बताया कि फीस रेगुलेट करने के लिए प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं। इस संबंध में कानूनी विभाग से भी परामर्श लेंगे। निजी स्कूलों की मनमानी को रोकने के लिए हर उचित कदम उठाएंगे।
निजी स्कूलों की एसोसिएशन की प्रतिक्रिया
एक्शन कमेटी ऑफ अनएडेड रिकॉग्नाइज्ड प्राइवेट स्कूल के अध्यक्ष भरत अरोड़ा ने कहा कि निजी स्कूल दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम 1973 की धारा 17(3) के तहत फीस में बढ़ोतरी करते हैं। बढ़ी हुई स्कूल फीस के आधार पर स्कूल आगामी वर्ष के खर्च तय करते हैं। यह एक सामान्य प्रक्रिया है।
हर साल स्कूल करते हैं मनमानी
विनीत बताते हैं कि स्कूल को इस वर्ष फीस बढ़ोतरी के लिए कोई अनुमति नहीं मिली है। इसके बावजूद स्कूल ने फीस में करीब दस फीसदी तक इजाफा कर दिया। हर माह करीब तीन से चार हजार रुपये का अतिरिक्त खर्चा बढ़ गया है। स्कूलों की मनमानी पर कोई कार्रवाई नहीं होती है।
साल का खर्चा 75 हजार रुपये बढ़ा
कमला नगर में रहने वाली ऋचा ने बताया कि उनका बेटा आठवीं कक्षा में पढ़ता है। स्कूल ने 15 फीसदी फीस बढ़ा दी है। इससे सालभर का लगभग 75 हजार रुपये का खर्चा अतिरिक्त बढ़ गया है। स्कूल तीन महीने की एक साथ फीस लेते हैं। यूनिफॉर्म का डिजाइन भी बदला गया है। स्कूल की ओर से किताबों और यूनिफॉर्म को लेकर वेंडर की सूचना साझा की गई है उसमें किसी के पास न तो किताब है न ही यूनिफॉर्म। अभिभावकों के विरोध दर्ज कराने पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती है।
गैर कानूनी तरीके से बढ़ा रहे स्कूल फीस
दिल्ली अभिभावक संघ की अध्यक्ष अपराजिता गौतम ने बताया कि सरकारी निकाय की जमीन पर बने करीब 400-450 स्कूलों ने 22 फीसदी तक फीस में बढ़ोतरी की है। जबकि इन स्कूलों को जमीन का आवंटन इस आधार पर किया जाता है कि फीस बढ़ाने से पहले विभाग से मंजूरी लेंगे। मगर स्कूल ऐसा नहीं करते है। स्कूल गैर कानूनी तौर पर फीस बढ़ा रहे हैं। इसकी जानकारी विभाग को भी है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती है।
निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी का ब्योरा (2025)
| कक्षा |
2023-24 फीस |
2024-25 फीस |
2025-26 फीस |
| केजी |
5403 |
7132 |
8487 |
| कक्षा 1 से 5 |
5153 |
6802 |
8094 |
| कक्षा 6 से 10 |
5268 |
6953 |
8273 |
| कक्षा 11 और 12 |
6818 |
9000 |
10710 |
नर्सरी से 12वीं कक्षा तक की बढ़ी फीस
| कक्षा |
वार्षिक शुल्क |
ट्यूशन फीस (मासिक) |
विकास शुल्क (मासिक) |
| नर्सरी |
41113 |
12781 |
1918 |
| केजी से 9वीं |
37824 |
11759 |
1764 |
| 10वीं |
34385 |
10689 |
1605 |
| 11वीं |
34385 |
11227 |
1605 |
| 12वीं |
29095 |
9501 |
1167 |
(शुल्क बढ़ने के बाद प्रत्येक कक्षा की फीस की स्थिति)