रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आज जब हम समाज से जातिगत भेदभाव के उन्मूलन का प्रयास कर रहे हैं, महिला सशक्तीकरण का निरंतर प्रयास कर रहे हैं, किसानों मजदूरों को सशक्त कर रहे हैं, तो यह सब भारतीय समाज और राजनीति दोनों को ही सशक्त करने का प्रयास है, और इसके पीछे गुरुदेवजी की ही प्रेरणा है। राजनाथ ने कहा कि ‘जेथा गृहेर प्राचीर, आपन प्रांगणतले, दिवस-शर्वरी वोशुधारे, राखे नाई खंडो क्षुद्रो कोरि। इसे हमारे यहां ‘वसुधैव कुटुंबकम’ भी कहा गया है; यानी संपूर्ण विश्व एक परिवार है, जहां अपने पराए का कोई भेद नहीं है, और समस्त जीवों में, जड़-चेतन में एक ही तत्व के वास की कल्पना की गई है।
युवा पीढ़ी टैगोर के आदर्शों मूल्यों को अपनाएं
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विश्व भारती को शिक्षा का मंदिर बताते हुए शुक्रवार को संस्थान के छात्रों से इसके संस्थापक रवींद्रनाथ टैगोर की तरह मानवतावादी बनने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि टैगोर के विचार और दर्शन भारतीय समाज को प्रभावित करते रहे हैं। सिंह ने यह भी कहा कि बंगाल में तीर्थयात्रा के दो केंद्र हैं, एक गंगा सागर और दूसरा विश्व भारती। छात्रों और संकाय सदस्यों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, टैगोर ने हमें दिखाया था कि राष्ट्रवाद क्षेत्रीय नहीं हो सकता। यह हमारी बहुलवादी संस्कृति पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने बच्चों में मानवतावाद के मूल्यों को विकसित करने के लिए इस जगह की स्थापना की। उन्होंने छात्रों से जीवन में उल्लेखनीय काम करने और इस बारे में सोचने का आह्वान किया कि इससे देश को कैसे फायदा हो सकता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 से युवाओं का समग्र विकास होगा। उन्होंने कहा, एक बच्चे का भविष्य उसकी परवरिश पर निर्भर करता है। टैगोर का विश्व भारती हमें दिखाता है कि यह रास्ता कैसे होना चाहिए … जेल जैसे कमरों की सीमाओं से मुक्त, प्रकृति की गोद में। रक्षा मंत्री ने कहा, आप जीवन में जो भी बनें… वैज्ञानिक, इंजीनियर, सुधारवादी, सामाजिक वैज्ञानिक या कलाकार, आपको गुरुदेव के मूल्यों को अपनाना चाहिए। समाज सुधारक गोपाल कृष्ण गोखले के शब्दों ‘बंगाल जो आज सोचता है, भारत वह कल सोचता है’ को याद करते हुए सिंह ने कहा कि इस कथन को फिर से साकार करने की जरूरत है और इसकी जिम्मेदारी युवाओं के ऊपर ही है।
बंगाल में फिर जागृति की आवश्यकता
रक्षा मंत्री ने कहा, मैं समझता हूं आज बंगाल में फिर से जागृति की आवश्यकता है, जिससे यह भूमि एक बार फिर पूरे देश को ज्ञान-विज्ञान और दर्शन के क्षेत्र में नया योगदान दे सके। मुझे पूरा विश्वास है कि आप इस दिशा में पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कवि, लेखक, संगीतकार और दार्शनिक टैगोर सामाजिक सुधारों और महिला सशक्तीकरण के माध्यम से परिवर्तन लाने में विश्वास करते थे।