पश्चिम बंगाल में बढ़ा कोरोना प्रतिबंध
पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में कोविड-19 प्रतिबंधों को बढ़ा दिया है, जिसके परिणामस्वरूप, राज्य के शैक्षणिक संस्थानों को 31 जनवरी, 2022 तक बंद कर दिया गया है। राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों में प्रशासन ने कर्मियों को 50 फीसदी क्षमता के साथ ही काम करने के निर्देश दिए हैं। पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जारी आधिकारिक नोटिस में कहा गया है कि स्कूलों, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के साथ सभी शैक्षणिक संस्थानों में शारीरिक कक्षाएं 31 जनवरी, 2022 तक निलंबित कर दी गई हैं। राज्य भर के शैक्षणिक संस्थानों में केवल प्रशासनिक गतिविधियों का ही संचालन होगा। एहतियात के तौर पर प्रशासनिक गतिविधियां 50 फीसदी क्षमता पर संचालित की जाएंगी।
पश्चिम बंगाल में ये है नए कोविड-19 के दिशा-निर्देश
पश्चिम बंगाल सरकार ने सार्वजनिक समारोहों जैसे मेलों, विवाह समारोह आदि को अनुमति दी है, लेकिन लोगों की उपस्थिति को सीमित कर दिया गया है। बंगाल में खुले मैदानों में कोविड-19 उपयुक्त व्यवहार का पालन करते हुए मेलों की अनुमति दी गईहै। वहीं, विवाह समारोह और इसमें शामिल होने के लिए 200 लोगों की क्षमता निर्धारित की गई है। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल सरकार ने रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक सार्वजनिक वाहनों की आवाजाही पर भी रोक लगा दी है। कानून, व्यवस्था, स्वास्थ्य और आवश्यक वस्तुओं के परिवहन और आवश्यक सेवाओं को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है।
तमिलनाडु में परीक्षाओं को स्थगित किया गया
तमिलनाडु राज्य सरकार ने स्कूलों को फिर से बंद करने का निर्णय लिया है। राज्य में 10वीं और 12वीं कक्षा के स्कूल 31 जनवरी, 2022 तक बंद रहेंगे। इसके अलावा, सभी परीक्षाओं को स्थगित करने का भी फैसला लिया गया है। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के कारण रविवार को राज्य के स्कूलों को बंद करने के आदेश की घोषणा की गई। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि 19 जनवरी, 2022 से शुरू होने वाली सभी परीक्षाएं भी स्थगित कर दी गई हैं। परीक्षा की नई तारीखों के बारे में जल्द ही छात्रों को समय आने पर सूचना दी जाएगी। इससे पहले, तमिलनाडु सरकार ने राज्य में ओमिक्रॉन वेरिएंट के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए कई कदम उठाए थे। इसमें 10वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों को वैक्सीन लगाने का भी निर्णय लिया गया था। हालांकि, हालातों में आए परिवर्तन के बीच राज्य ने रविवार को स्कूलों को बंद करने का फैसला किया। कई अभिभावकों, लोगों ने सरकार से मांग की थी कि कोविड-19 की स्थिति को देखते हुए शिक्षण संस्थानों को बंद करने का फैसला किया जाए। देश में पिछले 24 घंटों में 2 लाख से अधिक नए मामले सामने आए हैं और यह महामारी की तीसरी लहर के कगार पर है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, देश में टीकाकरण अभियान को रविवार को पूरे एक वर्ष हो चुके हैं। अब केंद्र सरकार ने 15 से 18 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों को भी टीका लगाने का फैसला किया है। जल्द ही तमिलनाडु समेत अन्य राज्यों में भी इन बच्चों को टीके लगाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
केरल में लगा शारीरिक कक्षाओं पर प्रतिबंध
केरल राज्य में कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए पहली से नौवीं कक्षा की शारीरिक कक्षाओं पर रोक लगा दी है। केरल के शिक्षा मंत्री वी सिवनकुट्टी ने कहा कि राज्य में कोविड-19 का इतना प्रसार नहीं हुआ है। लेकिन एहतियात के तौर पर पहली से 9वीं के छात्रों की शारीरिक कक्षाओं पर दो हफ्ते के लिए रोक लगा दी गई है। उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि एहतियात के तौर पर कक्षाओं के संचालन पर रोक लगाई गई है। यह प्रतिबंध सभी शैक्षणिक संस्थानों पर लागू होगा। बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। छात्रों की ऑनलाइन माध्यम से कक्षाओं का संचालन किया जाएगा। हालांकि, 10वीं से 12वीं कक्षा की शारीरिक कक्षाओं में कोई बदलाव नहीं होगा और स्कूलों में आने वाले उन बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि इन दो हफ्ते की अवधि में 35 लाख से अधिक छात्र घर पर रहेंगे और इस अवधि के दौरान ऑनलाइन कक्षाओं में हिस्सा लेंगे। शिक्षा विभाग की एक उच्च स्तरीय बैठक सोमवार को बुलाई जाएगी और उसके बाद संशोधित दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि माध्यमिक विद्यालय छोड़ने के प्रमाण पत्र और उच्चतर माध्यमिक की परीक्षा तिथियों में कोई बदलाव नहीं होगा, जिसकी घोषणा पहले ही की जा चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द से जल्द छात्रों का टीकाकरण करने का प्रयास किया जा रहा है और स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से उन्हें स्कूलों में ही वैक्सीन देने की व्यवस्था की जाएगी।