तीन स्तरों पर होगा पूरा कार्यक्रम
सीआईएससीई की यह पहल तीन स्तरों पर आयोजित की जाएगी। इसकी शुरुआत स्कूल स्तर से होगी और इसके बाद क्षेत्रीय तथा राष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
पहला स्तर: स्कूलों में होंगी मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चाएं
पहले चरण में 4 से 31 अक्तूबर 2026 तक स्कूल स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़ी चर्चाएं आयोजित की जाएंगी। छात्रों के साथ हर सप्ताह कक्षा में चर्चा होगी। इन चर्चाओं के लिए चार प्रमुख विषय तय किए गए हैं:
- छात्र तनाव और पढ़ाई का दबाव
- भावनात्मक कल्याण, डिजिटल जीवन और सकारात्मक रिश्ते
- नशीली दवाएं, नशीले पदार्थों का दुरुपयोग और स्वस्थ विकल्प
- मानसिक मजबूती और मदद मांगने का व्यवहार
इन चर्चाओं से छात्रों के विचारों और अनुभवों का एक बड़ा संग्रह तैयार होगा। साथ ही स्कूलों में छात्रों को सुनने और एक-दूसरे की मदद करने की भावना को बढ़ावा दिया जाएगा।
दूसरा स्तर: 18 क्षेत्रों में होंगे क्षेत्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम के दूसरे चरण में 4 से 14 नवंबर 2026 के बीच 18 क्षेत्रों में ऑनलाइन क्षेत्रीय छात्र मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।
स्कूल स्तर की चर्चाओं से चुने गए छात्र प्रतिनिधि और शिक्षक मार्गदर्शक इन सम्मेलनों में शामिल होंगे। वे स्कूल स्तर से सामने आए विचारों की समीक्षा करेंगे। इसके बाद निष्पक्ष और योग्यता आधारित प्रक्रिया के जरिए राष्ट्रीय स्तर के लिए प्रतिभागियों का चयन किया जाएगा।
तीसरा स्तर: हैदराबाद में होगा राष्ट्रीय सम्मेलन
इस पहल का अंतिम चरण 20 से 22 नवंबर 2026 तक हैदराबाद स्थित सीआईएससीई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में आयोजित किया जाएगा।
राष्ट्रीय सम्मेलन में 18 क्षेत्रों से 72 छात्र और 18 शिक्षक मार्गदर्शक शामिल होंगे। इनके अलावा मानसिक स्वास्थ्य और नीति विशेषज्ञ, सीआईएससीई का नेतृत्व, सहयोगी एजेंसियां और मीडिया भी कार्यक्रम का हिस्सा होंगे।
क्या होंगे इस पहल के प्रमुख परिणाम?
सीआईएससीई के अनुसार, इस पहल के तहत कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और संसाधन तैयार किए जाएंगे। इनमें सीआईएससीई स्टूडेंट मेंटल हेल्थ चार्टर भी शामिल है। इसमें भावनात्मक रूप से सुरक्षित स्कूलों के लिए सिद्धांत और सिफारिशें होंगी।
इसके अलावा स्टूडेंट वेल-बीइंग इंडेक्स, अच्छी कार्यप्रणाली वाले स्कूलों की गतिविधियों का संग्रह और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी उभरती चिंताओं पर श्वेत पत्र तैयार किया जाएगा।
छात्रों की बात को नीतियों से जोड़ने पर जोर
इस पहल की सफलता केवल कार्यक्रम आयोजित करने से नहीं मापी जाएगी, बल्कि इससे होने वाले बदलावों से मापी जाएगी। उन्होंने कहा, “हम अपने छात्रों की बात व्यवस्थित तरीके से सुनना चाहते हैं और उनके वास्तविक अनुभवों को व्यावहारिक सिफारिशों, स्कूलों की बेहतर कार्यप्रणाली और छात्र कल्याण के लिए साझा राष्ट्रीय ढांचे में बदलना चाहते हैं।”
सीआईएससीई इस सम्मेलन को भविष्य में हर दो साल में आयोजित होने वाला कार्यक्रम बनाने पर भी विचार कर सकता है।
इस पहल के जरिए सीआईएससीई का फोकस केवल छात्र मानसिक स्वास्थ्य पर बातचीत करने से आगे बढ़कर छात्रों की बात सीधे सुनने और उनके अनुभवों के आधार पर स्कूलों में बेहतर और सहयोगी माहौल तैयार करने पर है।