सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों के शिक्षकों को सोचो, साझा करें, सीखो और अभ्यास कार्यक्रम के माध्यम से प्रशिक्षित किया जा रहा है। इससे उनमें शिक्षण सीखने की समझ और मुख्य कौशल विकसित हो रहे हैं। दरअसल, कुछ समय पहले सीबीएसई ने शिक्षकों की सुविधा के लिए एक शोध-आधारित क्षमता निर्माण कार्यक्रम थिंक-शेयर-लर्न-प्रैक्टिस (टीएसएलपी) डिजाइन करने के लिए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस इंडिया के साथ साझेदारी की है। इस साझेदारी के तहत मास्टर ट्रेनर शिक्षकों की ट्रेनिंग सितंबर-अक्तूबर में हुई है।
सीबीएसई ने क्षमता निर्माण कार्यक्रम के डिजाइन के साथ-साथ संसाधनों को साझा करने के लिए भी ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस के साथ सहयोग किया है, ताकि शिक्षकों को बच्चों के लिए गतिविधियां आधारित कार्यक्रम लागू करने के कौशल के साथ सशक्त बनाया जा सके। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य 29000 स्कूलों के शिक्षकों को गतिविधि-आधारित शिक्षण वातावरण बनाने और बाल वाटिका 1, 2, 3 और ग्रेड एक और दो और तीन के बीच के शिक्षार्थियों के लिए शिक्षण-सीखने के तरीकों के बीच अंतर को पाटने के लिए सशक्त बनाना है। सीबीएसई के अनुसार, सोचो, साझा करें, सीखो, अभ्यास कार्यक्रम शिक्षकों को पाठ्यक्रम डिजाइन और शिक्षण-सीखने की प्रथाओं की समझ और मुख्य कौशल विकसित करने के लिए सशक्त बनाएगा।
स्कूल इनोवेशन काउंसिल का होगा गठन
अब स्कूलों में स्कूल इनोवेशन काउंसिल का गठन होगा। काउंसिल के गठन से बच्चों में रचनात्मक सोच व वैज्ञानिक समझ बढ़ेगी। काउंसिल स्कूलों, शिक्षाविदों, विशेषज्ञों और उद्यमियों को एक साथ आने और एकजुट होकर काम करने के लिए एक मंच प्रदान करेगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के इनोवेशन सेल और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने स्कूल इनोवेशन काउंसिल (एसआईसी) की शुरुआत की है। ऐसे में बोर्ड ने संबद्ध स्कूलों को एसआईसी की गाइडलाइंस के अनुसार काउंसिल का गठन करने के निर्देश दिए हैं।
बोर्ड का मानना है कि स्कूल इनोवेशन काउंसिल के गठन से स्कूलों में विचार, नवाचार और उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। स्कूल प्लस टू के स्तर पर काउंसिल की स्थापना करेंगे। इसके गठन से शिक्षकों, छात्रों के बीच डिजाइन सोच, स्टार्टअप फाइनेंस जागरूकता को भी बढ़ावा मिलेगा। इसका गठन कर स्कूल इनोवेशन प्रतियोगिता का हिस्सा भी बन सकते हैं और प्रति इनोवेशन दो लाख की फंडिंग भी प्राप्त कर सकते हैं।
इनोवेशन काउंसिल की गतिविधियां भी बोर्ड ने सुझाई हैं। बोर्ड के अनुसार, रचनात्मक सोच को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक स्कूल में इनोवेशन वॉल का गठन किया जाए, जहां छात्र नवाचार व विचारों का प्रदर्शन रचनात्मक तरीके से कर सकते हैं। मंत्रालय का इनोवेशन सेल तिमाही आधार पर काउंसिल की प्रगति की निगरानी करेगा। स्कूल स्तर पर स्कूल इनोवेशन काउंसिल समिति बनाएंगे, जिसमें अध्यक्ष, संयोजक (गतिविधि कोर्डिनेटर), शिक्षक प्रतिनिधि, सोशल मीडिया कोर्डिनेटर, छात्र प्रतिनिधि शामिल होंगे।