इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट, मंगलवार दोपहर 2 बजे सीबीएसई कंपार्टमेंट परीक्षा 2021 को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर भी सुनवाई करेगा। गौरतलब है कि 1,152 विद्यार्थियों द्वारा दायर एक संयुक्त याचिका में कहा गया है कि सीबीएसई नियमित छात्रों द्वारा तय की गई मूल्यांकन योजना के आधार पर ही कंपार्टमेंट के छात्रों का मूल्यांकन किया जाए।
पीटीआई के अनुसार यूपी पेरेंट्स एसोसिएशन, लखनऊ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कोर्ट में कहा था कि आंतरिक परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने में असमर्थ रहे छात्रों को कक्षा 12वीं की परीक्षा में शामिल होने का मौका दिया जाएगा। यह एक 'प्रीमियम' विकल्प है। आंतरिक मूल्यांकन या परीक्षा दोनों में से किसी में भी शामिल होने का विकल्प, प्रारंभिक चरण में दिया जाना चाहिए। यदि कोई विद्यालय या छात्र यदि आंतरिक मूल्यांकन का विकल्प नहीं चुनना चाहता है, तो जुलाई के मध्य में बारहवीं परीक्षाओं के लिए एक तारीख तय कर परीक्षा आयोजित कर सकता है।
सिंह ने कहा कि मूल्यांकन योजना में एकरूपता की आवश्यकता है। सीआईएससीई ने अंकों की गणना के लिए चयनित विषयों में अंग्रेजी विषय को अनिवार्य कर दिया है। वहीं सीबीएसई ने ऐसा कोई मानदंड निर्धारित नहीं किया है। विद्यालय परिणाम तैयार करने के लिए किन्हीं भी तीन विषयों का चयन कर सकते हैं। सिंह का कहना है कि आंतरिक मूल्यांकन की नीति दोनों केंद्रीय बोर्डों के लिए एक समान होनी चाहिए। आईसीएसई ने आंतरिक मूल्यांकन के लिए एक उचित योजना नहीं बनाई है। उदाहरण के तौर पर पिछले छह सालों के परिणाम में किस साल का कितना वेटेज लिया जाएगा।
निजी छात्रों और दूसरे कंपार्टमेंट वाले छात्रों की ओर से पेश अधिवक्ता अभिषेक चौधरी ने कहा कि सीबीएसई कक्षा 12वीं की कंपार्टमेंट परीक्षा जुलाई या अगस्त में स्थिति अनुकूल होने पर होगी। ऐसे में कंपार्टमेंट परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों को विद्यालयों में प्रवेश हासिल करने में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इस पर पीठ ने कहा कि वह महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों को यह निर्देश दे सकती है कि बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम जारी होने के बाद प्रवेश प्रक्रिया शुरू की जाए। लेकिन इस पर विचार मंगलवार को किया जाएगा।