केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) एक बार फिर विवादों में है। इस बार फीस घटाने के बाद भी पैरेंट्स बोर्ड से नाराज हैं। नाराजगी इस हद तक है कि यह मामला कोर्ट तक पहुंच चुका है। सीबीएसई और मानव संसाधन विकास विभाग (MHRD) को लीगल नोटिस तक भेजा जा चुका है।
दरअसल, बोर्ड ने कुछ दिनों पहले (18 जुलाई को) एक सर्कुलर जारी किया था। इसमें स्कूल बदलने के नियमों का उल्लेख किया गया था। अलग-अलग कुल 11 श्रेणियां बना कर हर श्रेणी के नियम के बारे में बताया गया था। इसमें से 11वीं श्रेणी के अंतर्गत किसी दूसरे स्कूल में कक्षा 9वीं या 11वीं में प्रोसेसिंग फीस के तौर पर प्रति स्टूडेंट 5 हजार रुपये फीस भरने के प्रावधान का उल्लेख किया गया था।
हालांकि पैरेंट्स सीबीएसई द्वारा एडमिशन के लिए रजिस्ट्रेशन फीस को एक हजार रुपये तक करने से भी नाराज हैं। इसके लिए पैरेंट्स एसोसिएशन बोर्ड के इस फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दे रहा है। कोर्ट में 9 सितंबर को बोर्ड के फैसले को चुनौती दी जाएगी।
पैरेंट्स का कहना है कि यह लोगों की आंखों में धूल झोंकने जैसा है। ऑल इंडिया पैरेंट एसोसिएशन के प्रमुख अशोक अग्रवाल ने कहा, 'यह केवल निजी स्कूलों की बात नहीं है। कई सरकारी स्कूल में सीबीएसई से संबद्ध हैं। इन स्कूलों में ज्यादातर ऐसे बच्चे भी पढ़ते हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं। जिनके पैरेंट्स इतनी फीस देने में अमसर्थ हैं। जब इनकी शिक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है तो इन्हें फीस क्यों देनी पड़े।'