सीबीएसई के बदलाव पर्याप्त नहीं
सुनवाई के दौरान कोर्ट में सीबीएसई के वकील ने यह कहते हुए प्रतिवाद किया कि बोर्ड रिजल्ट पॉलिसी में आंशिक संशोधन किया है, जिसने सुधार परीक्षा में 'विफल' होने वाले छात्रों को अपना 'पास' परिणाम बनाए रखने की अनुमति दी है, जो उन्हें मानक फॉर्मूले के अनुसार मिला था। हालांकि, पीठ ने इस पर सवाल उठाया और सीबीएसई से नीति में इस संशोधन पर भी पुनर्विचार करने को कहा।
सीबीएसई का तर्क- सुधार परीक्षा के अंकों को अंतिम माना जाए
सीबीएसई के वकील ने आगे यह कहते हुए तर्क दिया कि चूंकि ऐसे मामलों में परीक्षा का अंतिम चरण सुधार परीक्षा है, उसी के लिए अंकों को अंतिम ग्रेड माना जाना चाहिए। यह देखते हुए कि बोर्ड ने पहले छात्रों को प्राप्त दो अंकों में से बेहतर चुनने की अनुमति दी थी, पीठ ने इस संशोधन के औचित्य के लिए कहा और खंड को क्यों नहीं हटाया जा सका, जो प्रदान नहीं किया गया था।
इंप्रूवमेंट पॉलिसी पर पुनर्विचार को कहा था
सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से कहा था कि वह दिसंबर, 2021 में मानक फॉर्मूले के अनुसार हासिल किए गए अंकों से 12वीं कक्षा की सुधार परीक्षा में प्राप्त अंकों के इंप्रूवमेंट की अपनी नीति पर पुनर्विचार करे। लेकिन बोर्ड ने सिर्फ आंशिक बदलाव किए थे, जो कोर्ट ने पर्याप्त नहीं माने और सीबीएसई की इंप्रूवमेंट मार्क्स पॉलिसी खारिज कर दी। साथ ही छात्रों को च्वॉइस विकल्प देने के लिए निर्देशित किया।