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सीबीएसई 12वीं का रिजल्ट 2021 : मूल्यांकन मानदंड से संतुष्ट नहीं होने पर क्या है छात्रों के लिए विकल्प? यहां जानिए

Fri, 04 Jun 2021 03:17 PM IST
ललित फुलारा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

  • जो विद्यार्थी ऑब्जेक्टिव क्राइटेरिया से प्राप्त नंबरों से संतुष्ट नहीं होंगे, उनको कोरोना वायरस की स्थिति के सामान्य होने के बाद परीक्षा में बैठने का विकल्प दिया जाएगा।
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सीबीएसई - फोटो : social media
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विस्तार
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सीबीएसई बोर्ड इस साल बारहवीं कक्षा के छात्रों को मूल्यांकन मानदंड के जरिए पास करेगा। कोरोना वायरस की वजह से बारहवीं कक्षा की परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया है। अब बोर्ड की तरफ से बारहवीं कक्षा के परिणाम के लिए मूल्यांकन मानदंड की घोषणा की जाएगी। बोर्ड के सचिव का कहना है कि दो हफ्ते के भीतर बारहवीं के रिजल्ट के लिए मूल्यांकन क्राइटेरिया जारी कर दिया जाएगा।

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इस बीच छात्रों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि अगर वे मूल्यांकन मानदंड से संतुष्ट नहीं हैं, तो उनके पास क्या विकल्प है? आपको बता दें कि प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से जारी बयान में पहले ही कहा जा चुका है कि जो विद्यार्थी ऑब्जेक्टिव क्राइटेरिया से प्राप्त नंबरों से संतुष्ट नहीं होंगे, उनको कोरोना वायरस की स्थिति के सामान्य होने के बाद परीक्षा में बैठने का विकल्प दिया जाएगा। यानी कि अगर कोई छात्र सीबीएसई की तरफ से मूल्यांकन मानदंड के आधार पर रिजल्ट जारी करने पर प्राप्त अंकों से संतुष्ट नहीं है, तो वह बोर्ड परीक्षा दे सकता है। अगर छात्रों को लगता है कि मूल्यांकन मानदंड के आधार पर उनको कम नंबर मिले हैं, तो वे फिर से बारहवीं कक्षा की परीक्षाएं दे सकते हैं। लेकिन ये परीक्षाएं कोरोना की वजह से पैदा हुए हालात के सामान्य होने के बाद ही आयोजित होंगी।
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अभी बोर्ड की तरफ से यह जानकारी नहीं दी गई है कि मूल्यांकन मानदंड से असंतुष्ट छात्रों के लिए बारहवीं की परीक्षाओं का आयोजन कब किया जाएगा। बोर्ड के सचिव अनुराग त्रिपाठी का कहना है कि मूल्यांकन क्राइटेरिया से संतुष्ट नहीं होने वाले छात्र परीक्षाओं में बैठ सकते हैं। उन्होंने कहा कि ये परीक्षाएं कोविड-19 महामारी के सामान्य होने के बाद ही आयोजित होंगी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया है कि  बारहवीं कक्षा के रिजल्ट का मूल्यांकन मानदंड क्या रखेंगे यह एक बड़ी चुनौती है।

बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों को पास करने के लिए उनके स्कूलों में तीन साल के प्रदर्शन को देखा जा सकता है। यह सबसे चर्चित मूल्यांकन मानदंडों में से एक यह है कि छात्रों का मूल्यांकन पिछले वर्षों में क्रमशः नौवीं, दसवीं और ग्यारहवीं कक्षाओं में उनके नंबरों को आधार बनाकर किया जाए। इसके अलावा, मूल्यांकन मानदंड का दूसरा विकल्प 12वीं की व्यावहारिक और प्री-बोर्ड परीक्षाओं को बनाया जा सकता है। इसमें बारहवीं कक्षा के छात्रों के प्री बोर्ड परीक्षाओं और टेस्ट के अंकों के आधार पर उनका रिजल्ट तैयार किया जा सकता है। 

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