जॉब या दाखिले के लिए ग्रुप डिस्कशन के माध्यम से अभ्यर्थियों के व्यक्तित्व की विभिन्न विशेषताओं को जानने-समझने की कोशिश की जाती है
इसके तहत नेतृत्व क्षमता, प्रभावशाली ढंग से अपनी बात कहने की योग्यता, पहल करने की क्षमता, टीम के साथ काम करने की क्षमता आदि कई बातें शामिल होती हैं। विभिन्न परीक्षार्थियों के बीच होनेवाला ग्रुप डिस्कशन कई तरह का होता है, जैसे केस स्टडी से संबंधित अथवा करंट अफेयर से संबंधित।
जो भी टॉपिक हो, उस पर अभ्यर्थियों को निर्धारित नियमानुसार अपने-अपने विचारों का आदान-प्रदान करना होता है। इस दौरान कभी तो अभ्यर्थियों को एक-एक करके बोलने का अवसर मिलता है, तो कभी अवसर को झपटना पड़ता है। बहस के दौरान आप कितने आक्रामक या रक्षात्मक हो सकते हैं, इसका आकलन भी जीडी के माध्यम से किया जाता है।
ध्यान दें:
जीडी में सफलता प्रभावशाली ढंग से बोलने से मिलती है, न कि ज्यादा बोलने या तेज बोलने से।
विचारों को मन में व्यवस्थित रखने की कोशिश करें। तभी उस पर बोलना शुरू करें। ऐसा नहीं करने पर आप अटक सकते हैं और ऐसे में कोई दूसरा बोलने लगेगा।
खुद बोलने की कोशिश करें। साथ ही दूसरों की बात को भी ध्यान से सुनें। इससे आपको उसके समर्थन या विरोध में बोलने के लिए प्वॉइंट मिलेंगे।
जब भी बोलें, सार्थक बोलें। पूरे ग्रुप डिस्कशन के दौरान तीन-चार बार बोलें, पर सोच-समझ कर।
जीडी के विषय पर आपकी पकड़ अच्छी है तो आप पहले बोलना शुरू कर दें। यदि नहीं है, तो दूसरों की बातों को ध्यान से सुनें और उनमें प्वॉइंट ढूंढ़ें। इस ढंग से आप बेहतर बोल पाएंगे।
बोलते वक्त दूसरों को बेवजह रोकना ठीक नहीं। इस दौरान आप दूसरे के चुप होने या अटकने का इंतजार करें।
धाराप्रवाह बोलें और अटकने से बचें। लंबा बोलने की बजाय कम, पर संतुलित बोलना ठीक रहता है।
किसी एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे समूह को संबोधित करते हुए ही अपनी बात कहें।