चिंता और तनाव के माहौल में भी कैप्टन सलेबर्ग ने अपने अंदर के बागी से काम लिया और वो किया जो आम तौर पर कोई पायलट नहीं करता लेकिन अलग करने की वजह से कैप्टन सलेनबर्ग विमान में सवार सभी 155 मुसाफिरों की जान बचाने में कामयाब हुए। बागियों के बारे में अक्सर ये सोच रहती है कि वो दफ्तर के काम-काज और माहौल के लिए ठीक नहीं हैं लेकिन, फ्रांसेस्का कहती हैं कि बागियों की मौजूदगी दफ्तर को जिंदादिल बनाती है। उनका खिलंदड़पन, दूसरे लोगों से बात-चीत के बाद उनमें उत्साह भरता है। ऑफिस में अगर आप भी अब तक जी-हुजूरी गैंग में रहे हैं, तो शायद ये बिल्कुल सही वक्त है खुद को बागी बनाकर हुजूम से अलहदा खड़ा करने का।