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NEET के 5 आल इंडिया टॉपर्स से जानिए सफलता के मंत्र, बिहार की कल्पना का ये है सपना

Tue, 05 Jun 2018 11:19 AM IST
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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नीट टॉपर कल्पना कुमारी - फोटो : अमर उजाला
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कहते हैं बुलंद हौसलों के साथ सपनों की उड़ान मुकाम दिलाती है। इस कहावत को असल जिंदगी में साकार किया है कल्पना कुमारी ने। बिहार के एक छोटे से गांव से दिल्ली तक का सफर तय करने वाली कल्पना कुमारी बचपन से ही डॉक्टर बनना चाहती थीं। उनके पिता का कहना है कि बचपन में कल्पना अक्सर स्टेथोस्कोप कानों में लगाकर उनकी धड़कनें नापती थी। नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेस टेस्ट (नीट) 2018 में सर्वाधिक अंक लाकर उसने अपने सपनों को पूरा कर लिया। कल्पना कुमारी ने नीट परीक्षा में 99.99 फीसदी अंक हासिल कर पूरे देश में टॉप किया है।

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एम्स से डॉक्टरी करना चाहती हैं कल्पना      
कल्पना बताती हैं कि जिस तरह से उन्होंने पिछले कई सालों से मेहनत की थी और 12 से 13 घंटे की पढ़ाई रोजाना करती थीं। उन्हें पूरा विश्वास था कि वे नीट परीक्षा में अच्छे नंबरों के साथ अव्वल आएंगी। कल्पना चाहती हैं कि वे दिल्ली एम्स से अपनी एमबीबीएस पूरी करें। इसके लिए उन्होंने अलग से एम्स की प्रवेश परीक्षा भी दी है, जिसका परिणाम जून में आने वाला है। कल्पना का अभी तक बिहार बोर्ड से 12वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम नहीं आया है। उन्हें उम्मीद है कि वे अच्छे अंक लाकर उत्तीर्ण होंगी।      

पिता का था सपना, बेटे ने किया साकार

NEET में तीसरा स्थान पाने वाले हिमांशु
कल्पना से महज एक अंक कम लाकर तीसरा स्थान पाने वाले हिमांशु शर्मा इन दिनों हैदराबाद में हैं। वे अपने पिता के साथ गर्मियों की छुट्टियां बिताने पहुंचे हैं। नीट रिजल्ट आने के बाद हिमांशु ने बताया कि वे मूलरुप से रोहतक के गांव जसिया निवासी हैं। लेकिन उनका परिवार रोहतक के गोहाना रोड स्थित राजेंद्र नगर में निवासी है। उनके पिता बिरेंद्र कुमार रोहतक जिले के ससरौली गांव स्थित सरकारी स्कूल में विज्ञान के शिक्षक हैं।

चूंकि उनके परिवार में अभी तक कोई भी व्यक्ति चिकित्सीय वर्ग से जुड़ा नहीं था। इसलिए उनके पिता का सपना था कि वे डॉक्टर बने। इसी सपने को पूरा करने के लिए दसवीं तक उन्होंने रोहतक के पठानिया स्कूल से पढ़ाई करने के बाद दिल्ली के उत्तम नगर मोहन गार्डन का रुख किया। यहां जनकपुरी स्थित आकाश इंस्टिट्यूट से कोचिंग की। बारहवीं कक्षा में फिजिक्स, कैमिस्ट्री और बॉयोलॉजी के साथ उन्होंने 94 फीसदी अंक हासिल किए।

हिमांशु के पिता बिरेंद्र कुमार का कहना है कि अपने बेटे की उपलब्धि देख वे बहुत खुश हैं। जिस सपने को उन्होंने देखा था, उसे आज उनके बेटे ने पूरा कर दिखाया। बिरेंद्र ने कहा कि इससे ज्यादा खुशी उनके जीवन में और कुछ नहीं हो सकती। हिमांशु ने बताया कि उन्हें स्पोट्र्स और पढ़ाई दोनों में बेहद रुचि है।       

भारत के पूर्व राष्ट्रपति हैं आदर्श      
हिमांशु शर्मा का कहना है कि उनके जीवन में भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम उनके आदर्श हैं। वे अब तक डॉ. कलाम की सीख का अनुसरण करके ही यहां तक पहुंचे हैं। हिमांशु का कहना है कि वह दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज से अपनी एमबीबीएस करना चाहते हैं। अब बस उन्हें काउंसलिंग का इंतजार है। हिमांशु को उम्मीद है कि इस प्रदर्शन के साथ उन्हें पसंदीदा कॉलेज में आसानी से एमबीबीएस में प्रवेश मिल सकेगा।       

शौक को किया पूरा, डॉक्टर बन करेंगे गरीबों का इलाज

NEET में चौथा स्थान पाने वाले आरोश धमीजा
चौथा स्थान पाने वाले दिल्ली के शालीमार बाग निवासी आरोश धमीजा बताते हैं कि उन्हें डॉक्टर बनने का शौक था। जिसे पूरा करने के लिए वे काफी समय से मेहनत कर रहे थे। उनके पिता एक बिजनेसमैन हैं और माता गृहिणी। आरोश ने दिल्ली के रोहिणी स्थित रेयान इंटरनेशनल स्कूल से बारहवीं कक्षा में 91 फीसदी अंक हासिल करने के बाद नीट परीक्षा के लिए आवेदन किया था। आरोश का कहना है कि अब वे डॉक्टर बनने के बाद गरीबों का इलाज करना चाहते हैं। हालांकि आरोश अभी काउंसलिंग को लेकर गंभीर हैं। वे चाहते हैं देश के सर्वोच्च मेडिकल संस्थान से एमबीबीएस करना चाहते हैं। इसलिए भविष्य को लेकर वे ज्यादा जानकारी नहीं दे सकते। बता दें कि आरोश ने नीट 2018 में 686 अंक हासिल किए हैं।       

नियमित पढ़ाई ही सफलता का सूत्र

NEET में 5वीं रैंक प्राप्त करने वाले छात्र प्रिंस चौधरी
नीट में 686 अंक प्राप्त कर अखिल भारतीय स्तर पर 5वीं रैंक प्राप्त करने वाले छात्र प्रिंस चौधरी राजस्थान के बाड़मेर जिले के छोटे से गांव धौरीमन्ना से हैं और नियमित पढ़ाई को ही सफलता का सूत्र मानते हैं। प्रिंस ने बताया कि जो कोटा में निजी कोचिंग संस्थान में पढ़ाया जाता था, उसका नियमित रूप से रिवीजन करता था। प्रिंस ने कहा कि जब तक रोज की पढ़ाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक मैं सोता नहीं था। कोचिंग टाइम के अलावा कम से कम छह घंटे रोजाना सेल्फ स्टडी करता था। बाड़मेर के धोरीमन्ना में ही प्रारंभिक पढ़ाई हुई।

यहां 10वीं तक हिंदी मीडियम से पढ़ाई की, इसके बाद 11वीं व 12वीं में मीडियम इंग्लिश लेते हुए पढ़ाई की। दसवीं में 94.17 प्रतिशत अंक प्राप्त किए, वहीं 12वीं में 93.6 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। दसवीं में अच्छे अंक प्राप्त होने के साथ ही पिताजी ने कोटा से कोचिंग करवाने का मन बना लिया था। अभी एम्स के रिजल्ट का भी इंतजार है, एम्स दिल्ली से एमबीबीएस करना चाहता हूं। आगे किस स्पेशलिटी में जाना है इस बारे में अभी कुछ नहीं सोचा।

पिता रामाराम चौधरी धौरीमन्ना में ही मेडिकल स्टोर संचालित करते हैं, मां कमला देवी गृहिणी हैं। परिवार में छोटी बहन सिमरन भी है जो कक्षा 8वीं में है। पढ़ाई के साथ-साथ कॉमिक्स पढ़ने का शौक है, जब कोटा आया तो कॉमिक्स साथ लाया था। अभी भी समय मिलने पर पढ़ता हूं। इसके अलावा टीवी पर कार्टून देखता हूं। हिंदी फिल्मों के गाने सुनना पसंद है। सोशल मीडिया में रुचि नहीं है। प्रिंस ने बताया कि जब पापा ने कोटा भेजा तो थोड़ा अटपटा लगा था लेकिन यहां आकर देखा कि पढ़ाई के लिए इससे अच्छी जगह कोई नहीं हो सकती। यहां नेशनल लेवल का कम्पीटिशन मिलता है, जिससे हम एक दूसरे से स्वस्थ प्रतिस्पर्धा करते हुए आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं, इसके लिए पढ़ते हैं।
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दिन में पंद्रह घंटे पढ़कर हासिल किया रैंक : माधवन

NEET में 9वीं रैंक लाने वाले माधवन गुप्ता
आल इंडिया नीट एग्जाम के सोमवार को आए नतीजे में बठिंडा के माधवन गुप्ता ने नौवीं रैंक हासिल कर पंजाब एवं परिवार का नाम रोशन किया है। जैसे ही नतीजे के बारे में माधवन के परिजनों को पता चला तो उनमें खुशी की लहर दौड़ गई और सभी रिश्तेदारों के फोन की घंटियां बजनी शुरू हो गई। नतीजे के बाद माधवन फूला नहीं समा रहा था और आस पड़ोस वालों का बधाई देने के लिए तांता लग गया । वहीं बठिंडा की ही रवनीत कौर को नीट में दसवां स्थान मिला है। 

बातचीत के दौरान माधवन गुप्ता ने बताया कि जब वह दूसरे छात्रों के बारे में नीट एग्जाम पास करने संबंधी पढ़ता या सुनता था तो उसने प्लस टू पास करने के बाद नीट एग्जाम पास करने के लिए तैयारी करनी शुरू कर दी थी। जिस के चलते वह पूरे दिन में पंद्रह घंटे तक पढ़ाई करता था। उसने बताया कि उसको नीट एग्जाम पास कराने में कोचिंग देने वाले प्रोफेसरों और माता पिता का बहुत सहयोग रहा। इसके अलावा उसने नीट एग्जाम पास करने के लिए अपने एशो आराम को त्याग दिया था। परिवार वालों ने उसका कभी भी हौसला टूटने नहीं दिया और लगातार उसे पढ़ाई के लिए उत्साहित करते रहे। जिस के बलबूते आज उसने इस एग्जाम में नौंवा रैंक हासिल किया ।  

माधवन गुप्ता ने बताया कि जब उसने नीट एग्जाम की तैयारी शुरू कर दी तो उसने मॉडर्न युवाओं की सोच को अलग रख दिया और सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान दिया। उसने बताया कि उसने कभी अपना फेसबुक अकाउंट तक नहीं बनाया। व्हाट्सएप चलाने संबंधी माधवन ने कहा कि व्हाट्सएप चलाना मजबूरी बन गया था क्योंकि उसमें उसके प्रोफेसर जुडे़ थे जो उससे पढ़ाई संबंधी बातचीत कर मोटीवेट करते थे। उसने बताया कि कभी भी उसने बिना पढ़ाई संबंधी बातचीत के लिए व्हाट्सएप नहीं चलाया।
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