अधिकतर मार्केट रिसर्च गतिविधियां विशेषीकृत कंपनियों द्वारा संचालित की जाती हैं। दिन-प्रतिदिन विकास पथ पर अग्रसर इस उद्योग में असीमित अवसर मौजूद हैं। इसमें नियमित आधार पर अन्वेषण और संगतता का विकास होता है और व्यवसाय में नवीनता बनी रहती है। मार्केट रिसर्च कार्य के लिए अच्छे विश्लेषण कौशल के साथ तैयार शिक्षार्थी का होना पहली आवश्यकता है।
मार्केट रिसर्चर उपभोक्ता की पसंद, खरीददारी की आदतें, बाजार में उस प्रोडक्ट की कीमत और बिक्री के आधार पर डाटा एकत्रित कर उसका विश्लेषणात्मक अध्ययन करते हैं। इसके लिए उन्हें रिपोर्ट, ग्राफिक इलस्ट्रेशन जैसे टेबल, चार्ट्स, स्लाइड्स आदि तैयार करने पड़ते हैं ताकि उसे प्रजेंटेशन के जरिए समझाया जा सके। इसके अलावा मार्केट रिसर्चर इस बात पर भी नजर रखता है कि कौन-से क्षेत्र में प्रोडक्ट की मांग अधिक है और उपभोक्ताओं की प्रोडक्ट के प्रति अपेक्षाएं क्या हैं ?
मार्केट रिसर्च में तीन प्रमुख क्षेत्र सम्मिलित हैं, जो इस प्रकार हैं- 1. रिसर्च, 2. फील्ड वर्क और 3. डाटा विश्लेषण।
1. रिसर्चः इस विभाग का प्रमुख काम बाजार से जुड़ी समस्याओं का पता लगाना और डाटा को इकट्ठा करना होता है। साथ ही यह भी पता लगाना कि कितने लोग प्रोडक्ट का इस्तेमाल कर रहे हैं। रिसर्च रिपोर्ट्स और प्रस्ताव बनाने का काम भी इसी विभाग के जिम्मे होता है।
2. फील्ड वर्कः फील्ड वर्क के तहत फोन, मेल के जरिये अथवा घर-घर जाकर, मार्केट सर्वेक्षण किया जाता है।
3. डाटा विश्लेषणः डाटा विश्लेषण के तहत इकट्ठा की गई सामग्री का विश्लेषण कर परिणाम तक पहुंचा जाता है।
एक मार्केट रिसर्च एजेंसी में सामान्यत: उपलब्ध विभिन्न पद इस प्रकार होते हैं-
1. अनुसंधान निदेशक: मार्केट रिसर्च संगठन में यह सबसे वरिष्ठतम पद होता है। वह मार्केट रिसर्च परियोजना के डिजाइन और सही सुपुर्दगी के लिए पूर्णरूपेण प्रमुख जिम्मेदार पद होता है।
2. अनुसंधान प्रबंधकः यह अनुसंधान निदेशक को रिपोर्ट करता है और मार्केट रिसर्च परियोजनाओं की समय पर सही सुपुर्दगी में उनको सक्रिय सहयोग प्रदान करता है।
3. अनुसंधान अधीशासीः यह परियोजना के विकास और निर्देशन के लिए गठित टीम का हिस्सा होता है। वह डिजाइनिंग और डाटा अधिग्रहण में अनुसंधान विश्लेषक और अनुसंधान प्रबंधक के साथ भी कार्य करता है।
4. अनुसंधान विश्लेषकः इसका काम डाटा विश्लेषण और रिपोर्ट प्रस्तुतिकरण से जुड़ा होता है। भारत में मार्केट रिसर्च में तेजी से वृद्धि हो रही है। विपणन अनुसंधान आउटसोर्सिंग एक लोकप्रिय आउटसोर्सिंग राजस्व उत्पादक के तौर पर उभर रहा है। विपणन अनुसंधान के लिए भारतीय बाजार का कुल आकार दो अरब अमेरिकी डॉलर के करीब माना जाता है।
मार्केट रिसर्च इंडस्ट्री में वृद्धि का रुझान है। निश्चित तौर पर इसका भारतीय उद्योग पर असर दिखाई देगा, जिससे विश्व के अन्य भागों से आउटसोर्स की गई मार्केट रिसर्च परियोजनाओं का 10-15 प्रतिशत हिस्सा प्राप्त होने की आशा की जा सकती है। मार्केट रिसर्च के क्षेत्र में करियर बनाने हेतु जो शैक्षणिक योग्यता आवश्यक है वह इस प्रकार है- जो बतौर रिसर्च एक्जीक्यूटिव काम करना चाहते हैं उन्हें मार्केटिंग में एमबीए होना जरूरी है।
इसके अलावा सोशियोलॉजी, साइकोलॉजी या एन्थ्रोपोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएट युवाओं हेतु भी इस क्षेत्र में चमकीले अवसर हैं। वे युवा जो फील्ड वर्क करना चाहते हैं उनके पास सांख्यिकी, भूगोल, अर्थशास्त्र, सामाजिक विज्ञान या कंप्यूटर साइंस में डिग्री के साथ ही अच्छी कम्युनिकेशन स्किल भी होनी चाहिए। इस क्षेत्र में रोजगार की बात की जाए तो कंपनियों, शिक्षण संस्थानों, यहां तक कि सरकार को भी मार्केट रिसर्चर की जरूरत पड़ती है, इसलिए इस क्षेत्र में उजली संभावनाएं हैं।
मल्टीनेशनल और मार्केटिंग संगठन, सरकारी विभाग और रिसर्च इंस्टीट्यूशन इन-हाउस मार्केट रिसर्च ऑपरेशन का काम करते हैं जिसके लिए मार्केट रिसर्चर की जरूरत पड़ती है। सरकारी विभागों को भी महत्वपूर्ण मुद्दों पर लोगों की राय जानने हेतु मार्केट रिसर्चर की जरूरत पड़ती है। इसे देखते हुए इस क्षेत्र में अवसरों की कोई कमी नहीं है। ऐसे बहुत से नियमित और दूरस्थ शिक्षण पाठ्यक्रम हैं जो एक मार्केट रिसर्चर के लिए आवश्यक कौशल उपलब्ध कराने में मदद कर सकते हैं। मार्केट रिसर्च सभी बी-स्कूलों के पाठ्यक्रमों में एक प्रमुख विषय के रूप में उपलब्ध है। दूरस्थ शिक्षण पद्धति के तहत भी बहुत से लोकप्रिय पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं।