डिजास्टर सेंटर में भूकंप, बाढ़,उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर व हिमाचल प्रदेश में पहाड़ों पर भूस्खलन आदि पर रिसर्च होगी। इसके अलावा ई-लर्निंग सेंटर फॉर सब्ट्डीज में एमए और पीएचडी प्रोग्राम की पढ़ाई होगी, जिसमें इंफोरमेशन कम्यूनिकेशन टेक्नोलॉजी से संबंधित जितनी भी नई डेवलेपमेंट होगी, उसे पढ़ाया जाएगा।
वहीं, नेशनल सिक्योरिटी स्ट्डी सेंटर को भी मंजूरी दी गयी है। काउंसिल में दाखिला नियमों में कोई बदलाव नहीं है। हालांकि अनिवार्य हाजिरी का फैसला पूर्व की भांति लागू रहेगा। बता दें कि नए पीएचडी आर्डिनेंस 2018 के तहत वर्ष 2013 में जिन छात्रों ने पीएचडी में प्रवेश लिया होगा, वे कभी भी 9(बी) क्लोज के तहत फिर से रजिस्टर्ड हो सकते हैं।
जबकि वर्ष 2014-2017 के बीच जिन छात्रों ने रजिस्ट्रेशन करवाया होगा, वे आगामी दस साल तक रजिस्टर्ड हो सकते हैं। हालांकि जिन छात्रों ने वर्ष 2018 से रजिस्ट्रेशन करवाया होगा, उन्हें इस सुविधा से बाहर किया जाएगा। 9(बी) क्लोज का लाभ लेने वाले छात्रों को हॉस्टल और मेडिकल जैसी सुविधाएं पहले की तरह ही मिलती रहेंगी।