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JEE Advanced: बदलेगा परीक्षा पैटर्न, एप्टीट्यूड के प्रश्न होंगे शामिल; साल में 2-3 बार हो सकता है एग्जाम

सार

JEE Advanced Exam Pattern: आईआईटी कानपुर जेईई एडवांस परीक्षा में सुधार को लेकर नया रोडमैप तैयार कर रहा है। प्रस्तावित बदलावों के तहत परीक्षा का पैटर्न बदलेगा, इसमें एप्टीट्यूड से जुड़े प्रश्न जोड़े जाएंगे और साल में दो से तीन बार परीक्षा कराने की तैयारी की जा रही है।
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Exam - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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Exam Pattern Change: केंद्र सरकार जेईई एडवांस के परीक्षा पैटर्न में बदलाव की तैयारी कर रही है। नए पैटर्न में फिजिक्स, कैमिस्ट्री और मैथ्स (पीसीएम) के साथ एप्टीट्यूड के प्रश्न भी शामिल होंगे।ज्वाइंट एडमिशन बोर्ड (जैब) की देखरेख में आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल की अध्यक्षता में आईआईटी विशेषज्ञ छह महीने में जेईई एडवांस रिफॉर्म का रोडमैप बनाकर देंगे। उसके बाद पायलट रिजल्ट और विश्लेषण के आधार पर चरणबद्ध तरीके से कार्ययोजना लागू की जाएगी।

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जेईई मेन की तर्ज पर साल में दो से तीन या चार बार जेईई एडवांस की परीक्षा आयोजित की जाएगी। अभी इसकी साल में एक ही बार परीक्षा होती है। नई योजना में परीक्षा कई दिनों तक अलग-अलग स्लॉट में आयोजित करने की तैयारी है। छात्र अपनी सुविधानुसार परीक्षा में बैठ सकेगा।

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एप्टीट्यूड शामिल करने से पीसीएम के प्रश्न कम होंगे

अभी जेईई एडवांस में पीसीएम के प्रश्न पूछे जाते हैं। नई योजना में एप्टीट्यूड को भी शामिल करने से प्रश्न-पत्र में पीसीएम के प्रश्नों की संख्या कम हो जाएगी। पीसीएम के लिए छात्र कोचिंग जाते हैं। एप्टीट्यूड के प्रश्न पूछने का मकसद, छात्र की तार्किक क्षमता, गणितीय कौशल, और समस्या समाधान की क्षमता को परखना है। इससे परीक्षा का कड़ा स्तर थोड़ा आसान होगा। नए पैटर्न में विषयों के बजाय क्रिटिकल थिंकिंग, स्किल को उभारना है।

क्यों पड़ी जरूरत: नई शिक्षा नीति

में परीक्षाओं का तनाव दूर करने की सिफारिश की गई है। इसलिए छात्रों का तनाव दूर करने और कोचिंग पर निर्भरता कम करने के लिए पैटर्न में बदलाव करने की योजना है। इस परीक्षा को लेकर छात्र सबसे अधिक तनाव में रहते हैं। करीब 19 हजार सीट हैं और डेढ़ से दो लाख छात्र परीक्षा में शामिल होते हैं। अभिभावक अपने बच्चों को आईआईटी तक पहुंचाने के लिए छठी कक्षा से कोचिंग सेंटर में दाखिला करवा देते हैं। स्कूल और कोचिंग की पढ़ाई के कारण छात्र अत्यधिक तनाव में आ जाते हैं। कई छात्र अत्यधिक तनाव नहीं झेल पाने के कारण अपनी जिंदगी को समाप्त कर रहे हैं। इसलिए तनाव को कम करने के लिए पैटर्न में बदलाव की मांग उठी है।
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