अंबेडकर नगर जिले के इयाकी सूबेदार का पूरा गांव निवासी किसान आशाराम वर्मा की बेटी अंजली ने सपने में भी नहीं सोचा था कि वह कभी यूपी टॉप करेगी। अमर उजाला से बातचीत में अंजली ने इस मुकाम तक पहुंचने में घर से स्कूल तक के माहौल और पढ़ाई की अपनी रणनीति तक के अनुभवों को साझा किया। पढ़ाई के लिए ही माता-पिता ने गांव से दूर इलाहाबाद भेज दिया।
इविवि से स्नातक कर रही बड़ी बहन दीक्षा के साथ सलोरी में किराये के कमरे में रहकर पढ़ाई करने वाली अंजली इस कामयाबी का श्रेय माता, पिता , बहन, भाई और अपने शिक्षकों को देती हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल की पढ़ाई ही उनके काम आई। माता-पिता जिस भरोसे के साथ पेट काटकर पढ़ाई के लिए उसे प्रोत्साहित करते रहे, उस भरोसे को हमेशा जीतने की चिंता करती रही। रोज चार बजे उठना और छह से सात घंटे पढ़ाई करना उसका नियम था।