जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा (उ.प्र.) का 20वां शैक्षणिक सत्र "ओरिएंटेशन" कार्यक्रम के साथ शुरु हुआ। कुलपति प्रो. दुर्ग सिंह चैहान ने नवागन्तुक छात्र-छात्राओं व उनके अभिभावकों को जीएलए में प्रवेश पर बधाई देते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में जीएलए की अलग ही पहचान है, उसका कारण है विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास एवं सर्वश्रेष्ठ रोजगार।
उन्होंने नवागन्तुक विद्यार्थियों को "ओरिएंटेशन" कार्यक्रम का महत्त्व समझाते हुए बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य नए छात्र-छात्राओं को यूनिवर्सिटी के नियमों व शिष्टाचार से अवगत कराना है ताकि वह यहां के परिवेश को नज़दीकी से समझते हुए शीघ्र ही स्वयं को उसके अनुसार ढाल सकें। साथ ही नवागन्तुक छात्र-छात्राओं और उनके सीनियर्स छात्रों के मध्य, कार्यक्रम के दौरान मेलमिलाप के जरिये प्रेम, आदर और सौहार्द की भावना पैदा करना है।
विश्वविद्यालय के सेके्रटरी सोसायटी एवं कोषाध्यक्ष श्री नीरज अग्रवाल ने नव प्रवेषित विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए ,कई प्रेरणादायक कहानियों के माध्यम से छात्रों को प्रोत्साहित किया और बताया कि सफलता पाने के लिए लक्ष्य निर्धारित करना अत्यन्त आव’यक है एवं उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नकारात्मक विचारों व आलोचनाओं पर ध्यान न देते हुए सच्ची ईमानदार व कर्मठ होना भी आवश्यक है।
उन्होंने छात्रों से साफतौर पर कहा कि शिक्षण से संबंधित कभी कोई परेशानी आये तो वह छात्र अपनी बात को शिक्षक एवं विभागाध्यक्ष से सामने सम्मान से रखें। छात्र शिक्षण से संबंधित आज कोई परेशानी बताने में हिचकिचाहट रखेगा तो उसे कल भी हिचकिचाहट महसूस होगी और उसे कभी भी समस्या का समाधान नहीं मिल सकेगा।
पढ़ें- GLA University के बीटेक मैकेनिकल विभाग शिक्षकों के शोध हुए प्रकाशित
उन्होंने दो पंक्तियों के माध्यम से छात्रों को समझाते हुए कहा कि जब हौंसला बना लिया है ऊंची उड़ान का...फिर देखना फिजूल है कद आसमान का... उन्होंने कहा कि छात्रों को यह दृढ इच्छा शक्ति लेकर चलना होगा कि मैं नहीं कर सकता, मेरे से नहीं होगा, जो काम दूसरा कर सकता है वह मेरे से नहीं होगा इन विचारों को मन से त्यागना होगा। इन सबको त्यागने के बाद छात्र एकजुट होकर आगे बढ़ सकते हैं।
प्रतिकुलपति एवं प्रबंधन संस्थान के निदेशक प्रो. आनंद मोहन अग्रवाल ने नवागन्तुक छात्र-छात्राओं को दृढ संकल्पित कराते हुए कहा कि सभी विद्यार्थी नियमित रूप से अध्ययन करेंगे तथा समय-समय पर विश्वविद्यालय के विभिन्न कार्यक्रमों में प्रतिभागी बन अपने व्यक्तित्व का विकास करेंगे।