परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद छात्र अपने सपने को पूरा करने के लिए सबसे अच्छे कॉलेज और पाठ्यक्रमों की तलाश में रहते हैं। ऐसे में उनके सामने सबसे पहली चुनौती यह तय करना होता है कि कौन कौन से विश्वविद्यालयों में आवेदन किए जाए।
सही कोर्स और विश्वविद्यालय की खोज के दौरान छात्रों के पास असीमित और अनगिनत विकल्प उपलब्ध होते हैं। कई तरह के सवाल मन में आते है, बड़े शहर में जाए या छोटे परिसर में अध्ययन करें, डे स्कॉलर या हॉस्टेलर, सही जगह चुनने और बेहतर सुविधाओं के साथ पढाई, ऐसा कॉलेज और वातावरण मिल जाए ये कोई आसान काम नहीं है।
इस विषय में संस्कृति यूनिवर्सिटी के प्रो चांसलर राजेश गुप्ता जी से हमारी बात हुई, उन्होंने काफी महत्वपूर्ण बातें बताई जिनसे ज्यादातर छात्रों को अपने भविष्य का चुनाव करने के दौरान गुजरना पड़ता है, साथ ही उन्होंने ये भी बताया की किस तरह से छात्र सही मार्गदर्शन प्राप्त करके अपने लक्ष्य को पा सकते है।
प्रो चांसलर राजेश गुप्ता जी ने अपने एक्सपीरियंस को साँझा करते हुए कई जानकारियां दी जिससे छात्रों को सहयता मिल सकती है। इसके साथ ही हमने संस्कृति यूनिवर्सिटी के चांसलर सचिन गुप्ता जी से भी उनकी प्रतिक्रिया ली, इस विषय पर उन्होंने कई ऐसे पॉइंट्स बताए जिस पर छात्र अपने करियर के चुनाव में अमल कर सकते है।
प्रो चांसलर राजेश गुप्ता जी के अनुसार छात्र सबसे पहले ये सुनिश्चित करें कि आपने सही विषय चुन लिया है, जो आपके लिए सबसे अच्छा एवं उपयुक्त हो। जो विषय आपने चुना है उस विषय के बारे में निश्चित होना बेहद जरुरी है, आप जो करना चाहते हैं वह आपके भविष्य को निर्धारित करेगा। एक अच्छे भविष्य के लिए, लिए जाने वाले फैसले आसान नहीं होते, खासकर एक विशिष्ट क्षेत्र चुनाव करने के लिए अच्छी सलाह की आवश्यकता होती है। माता-पिता, शिक्षक, मित्रों और अन्य लोगों के द्वारा सर्वोत्तम सलाह दी जाती है, लेकिन अंतिम चयन आपकी खुद की रुचि से होना चाहिए।
राजेश गुप्ता जी ने बताया की यह सुनिश्चित करना जरुरी है की आप पाठ्यक्रम के लिए आवेदन कर रहे हैं, न कि विश्वविद्यालय के लिए अधिकांश छात्र विश्वविद्यालय की सुंदरता एवं नाम के आधार पर विश्वविद्यालय चुनते हैं और कोर्स के बारे में ध्यान नही देते, जैसे कि जिस कोर्स में वह एडमिशन चाहते है वह यहाँ अच्छा पढ़ाया जाता भी है या नहीं।
एक छात्र को यह ध्यान रखना चाहिए की उसने अपना भविष्य सवारने के लिए एडमिशन लिया है, किसी भी प्रकार के दबाव जैसे पारिवारिक प्रेशर कि वजह से या किसी भी ऐसे व्यक्ति जो ज्यादा जानकार न हो उनके कारण गलत निर्णय न ले। यूनिवर्सिटी जाए उसके बारे में जानकारी ले अच्छी तरह पूछ ताछ करे, विशेषज्ञ से परामर्श करें, पता करे सारा प्रोसेस तब जा कर एडमिशन ले।
चांसलर सचिन गुप्ता जी के अनुसार छात्र पहले यह स्पष्ट करें कि क्या वह एक प्रैक्टिकल लर्निंग देने वाली यूनिवर्सिटी में जाना चाहते हैं या शिक्षण वाली।रिसर्च यूनिवर्सिटी रिसर्च पर केंद्रित होती है और टीचिंग विश्वविद्यालय शिक्षण पर ध्यान केंद्रित करता है: इन दोनों के बीच का अंतर जानने के लिए प्रैक्टिकल ओरिएंटेशन आवश्यक है।
औद्योगिक शिक्षा छात्रों को तीव्र प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए तैयार करती है। व्याख्यान, सेमिनार, कार्यशालाओं, औद्योगिक विजिट के साथ आप इस विषय को और अधिक समझ सकते है, साथ ही व्यक्तिगत मूल्यांकन भी कर सकते है। सचिन गुप्ता जी ने बताया की संस्कृति यूनिवर्सिटी फॉर इंजीनियरिंग बच्चों को ऐसा ही वातावरण प्रदान करती है।
विश्वविद्यालय के खोज के दौरान ये बेहद महत्वपूर्ण है की जिस भी यूनिवर्सिटी में आप जा रहे हो या एडमिशन लेने का सोच रहे हो उसकी रैंकिंग और सम्बन्ध किस यूनिवर्सिटी के साथ जुड़े है।
ये सब जाँच कर ले क्योंकि अधिकांश विश्वविद्यालय सेमेस्टर का विकल्प प्रदान कराते हैं, या सेमिनारों और अनुसंधान के लिए दुनियाभर में खुलने वाले विभिन्न विश्वविद्यालयों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ संबंध बनाए रखते हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण स्टूडेंट और टीचर रेश्यो है, क्योंकि जितना कम और छोटा बैच होगा छात्रों के लिए उतना बेहतर होगा, वे अनगिनत प्रश्न पूछ सकते हैं और विषयों को बेहतर समझ सकते हैं।
सचिन गुप्ता जी का मानना है की आधा ज्ञान बहुत खतरनाक होता है, इस विशाल जानकारी के युग में सब कुछ कक्षा के व्याख्यानों से प्राप्त नहीं किया जा सकता है। एक छात्र को सही और अधिक जानकारी के लिए पुस्तकालय में पर्याप्त समय व्यतीत करना होगा, ज्ञान अर्जित करने के लिए पुस्तकालय सबसे बेहतर जगह है।
चाहे आप एक बेहतरीन फुटबॉलर हों या शतरंज खेल में उस्ताद हों आपको विश्वविद्यालय में कार्यक्रमों और समितियों की खोज करनी चाहिए ताकि आपके द्वारा ये सुनिश्चित किया जा सके कि यह आपके शौक से मेल खाएंगे भी या नहीं। सभी विश्वविद्यालय अपनी एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी की लिस्ट प्रदान कराते हैं, और छात्रों के जीवन में यह भी महत्वपूर्ण है, विश्वविद्यालय सिर्फ अध्ययन के बारे में नहीं है!
जब यूनिवर्सिटी में दाखिला हो जाता है तो आप अपने घर से दूर हो जाते है, इसलिए जरुरी है आप मैत्रीपूर्ण व्यव्हार रखे चाहे हॉस्टल हो या पी.जी हो आप शायद पहली बार अपने परिवार से दूर हो। इसलिए यह जरूरी है कि आप जिस आवास में रहते हैं वहां अच्छे से रहें। आपको छोटी छोटी चीज़ें सीखनी पड़ सकती है जैसे कि खाना पकाना, वाशिंग मशीन का उपयोग, रूम साफ करना इत्यादि।
उनके अनुसार ये बेहद जरुरी है की आपने जिस भी विश्वविद्यालय में एडमिशन के लिए सोचा है, उसके बारे में रिव्यु करे, पता करे वहां की पढाई कैसी है, वातावरण कैसा है, वहां जो छात्र पढ़ रहे है वो वहां की पढाई से संतुष्ट है या नहीं, ये सब जानने से आपके अंदर कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और आपका संकोच भी कम होगा।
यह कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां और तथ्य थे जो संस्कृति विश्वविद्यालय के चांसलर एवं गुरुजनो द्वारा छात्रों को मार्गदर्शन के लिए बताये गए।