1974 में बदला चुनाव का पूरा चेहरा
1974 डूसू चुनाव के इतिहास में निर्णायक मोड़ साबित हुआ। इसी साल प्रत्यक्ष चुनाव की शुरुआत हुई। अब कॉलेजों के प्रतिनिधियों के बजाय विश्वविद्यालय के छात्र सीधे मतदान कर अपने छात्रसंघ पदाधिकारियों को चुनने लगे। प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली के तहत डूसू के पहले अध्यक्ष आलोक कुमार बने, जो एबीवीपी से जुड़े छात्र नेता थे। इसके बाद डूसू चुनाव धीरे-धीरे छात्र राजनीति से निकलकर बड़े राजनीतिक प्रभाव वाले चुनाव में बदलता चला गया।
जब डूसू चुनाव पहुंचा अर्श पर : एक समय डूसू चुनाव की भव्यता ऐसी हो गई कि इसे दिल्ली के नगर निगम और विधानसभा चुनावों से जोड़कर देखा जाने लगा। छात्र नेताओं के प्रचार में बड़ी संख्या में समर्थक, वाहनों के काफिले और भारी प्रचार अभियान नजर आने लगे। चुनाव की गूंज राष्ट्रीय राजनीति तक सुनाई देने लगी।