जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा में ‘ब्रहमाण्ड विज्ञान‘ पर दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान यादवपुर विश्वविद्यालय कोलकाता के लब्ध प्रतिष्ठित एवं ब्रहमाण्ड विज्ञान के विद्वान प्रो. फारूक रहमान ने वार्महोल डार्कमैटर द्वारा उत्पन्न होता है
तथा यह ब्रहमाण्ड के विकास में कैसे महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि ब्लैक होल अंतरिक्ष का वह हिस्सा है, जिसका गुरूत्वाकर्षण क्षेत्र इतना शक्तिशाली होता है कि वह अपने ऊपर पड़ने वाले प्रकाश को अवशोशित कर लेता है और बाहर कुछ भी नहीं आने देता। इस प्रकार ब्रहमाण्ड में कई ब्लैकहोल हैं, जिनका वजन सूर्य से 6. 8 अरब दूना ज्यादा है और यह ब्लैक होल समूचे सौर मंडल को निगल सकता है।
भारतीय विश्वविद्यालय संघ तथा कुलपति प्रो. दुर्ग सिंह चैहान ने सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए कहा कि कई तरह के प्रदूषण बढ़ने के कारण ही प्रकृति में विकृतियाँ उत्पन्न हुई हैं। वातावरण एवं ब्रह्माण्ड को स्वच्छ रखने के लिए जन जन को
जागरुक करना होगा। कार्यशाला के माध्यम से वातावरण व ब्रह्माण्ड में हो रहे बदलाव के बारे में जानने का यह एक सुंदर मौका है।
उन्होंने अपने लंबे अनुभव को साझा करते हुए प्राचीन आध्यात्म व आधुनिकता के बारे में विस्तार से जानकारी दी।विश्वविद्यालय के डीन रिसर्च प्रो. अनिरूद्ध प्रधान ने सम्मेलन में अपने शोध अनुभवों का उल्लेख करते हुये स्पष्ट किया कि
मानवआदि काल से ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति एवं विकास के बारे में सोचता रहा है।