अंक समान तो रैंक अलग-अलग क्यों?
जवाब - मैथ्स, फिजिक्स और पाजीटिव टू नेगेटिव अनुपात से बनती है कटऑफ परीक्षा परिणाम में छह छात्रों के अंक 350 हैं, लेकिन टॉपर्स अलग-अलग। रिजल्ट के दौरान सबसे पहले छात्र का मैथ्स, फिर फिजिक्स और उसके बाद पॉजीटिव टू नेगेटिव अंक का विश्लेषण होता है। उसके बाद एक समान अंक होने के बाद भी टॉपर्स के नाम तय होते हैं। इस बार कटऑफ में सात फीसदी की गिरावट है, पिछले साल 81 फीसदी था तो इस बार 74 फीसदी है। जेईई मेन का पेपर होने के बाद विश्लेषण के आधार पर देखा गया था कि पिछले सालों के मुकाबले ओवरऑल पेपर कठिन था।
- आरएल त्रिखा, पूर्व आईआईटीयन व फिटजी
आईआईटी में लड़कियों के लिए 779 सीटें
इस वर्ष 23 आईआईटी में लड़कियों को 14 फीसदी आरक्षित सीटों पर प्रवेश दिए जाएंगे। रैंक के अनुसार कुल 779 सीटों पर दाखिले होंगे।