Career: व्यस्त जीवन में अपने भविष्य और कॅरिअर पर विचार करने के लिए भी समय निकालना जरूरी है। अगर आप ऐसा नहीं कर रहे हैं, तो हो सकता है आप गलत दिशा में बढ़ रहे हों। यह विशेष रूप से आपके कॅरिअर पर लागू होता है। इसलिए हर तीसरे महीने 'कॅरिअर डिटॉक्स' करना महवत्पूर्ण हो जाता है। इसमें मुख्य रूप से तीन चरण शामिल होते हैं। पहले चरण में खुद से कुछ प्रश्न करें, जो इस बात पर केंद्रित हो कि क्या आप अभी भी अपनी वर्तमान स्थिति से खुश हैं? दूसरा चरण आपके मूल्यों को बताता हो और तीसरा चरण, जो आपने सीखा है, उसे अपने कॅरिअर के साथ संरेखित करने के लिए है। जीवन में संतोषजनक परिणाम पाने के लिए अपनी कार्यशैली या कॅरिअर में आवश्यक जोड़-घटाव का अभ्यास करना जरूरी हो जाता है।
आत्म-जागरूकता है जरूरी
अधिकांश लोग अपने कार्यों के रिपोर्ट कार्ड के लिए स्व-मूल्यांकन के बजाय दूसरों पर निर्भर रहते हैं। ऐसा करना ठीक नहीं है। पहले खुद से खुद का मूल्यांकन करें, उसके बाद दूसरों की प्रतिक्रियाएं लें। कॅरिअर में संतोषजनक शुरुआत आत्म-नेतृत्व और आत्म-जागरूकता से ही होती है। इसका कारण यह है कि आपको आपसे बेहतर कोई नहीं समझ सकता। इसके लिए अपनी भावनाओं, सोच और ऊर्जा के स्तर पर विचार करें। किसी विशेष परियोजना या लक्ष्य को पाने की यात्रा में आप जो भी सीखते हैं या उनमें आने वाली चुनौतियों पर भी विचार करें।
जोड़-घटाव को समझें
आपके मूल्य ही आपको सबसे ज्यादा प्रेरित करते हैं और सर्वाधिक मायने रखते हैं। वे आपके कार्यों के पीछे के ‘क्यों’ होते हैं। काम के संदर्भ में आपके मूल्यों में नेतृत्व, पारदर्शिता और अर्थ की भावना आदि शामिल होती है। अक्सर हमारे जुनून और रुचियां का संबंध हमारे मूल्यों से होता है। ऐसे में समय के साथ मूल्यों का विकसित होना या बदलना स्वाभाविक है। इसलिए खुद से पूछें कि कार्यस्थल पर मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण क्या है? क्या पिछले तीन महीनों में आपकी कार्यशैली में कोई बदलाव आया? इन सवालों के जवाब खोजने का प्रयास करें, जिससे कॅरिअर के लिहाज से उपयोगी जोड़-घटाव को समझ सकें।
आजीवन सीखने की प्रवृत्ति
आपने अब तक जो कुछ भी सीखा है, उसे अपनी वर्तमान स्थिति में लागू करें। इससे खुद में और अपने कॅरिअर में क्या बदलाव ला सकते हैं, यह जानने में आसानी होगी। आपको हमेशा ऊर्जावान रखने वाले कार्यों और परियोजनाओं की ओर ध्यान केंद्रित करें। नकारात्मकता को खत्म करने का प्रयास करें और ‘आजीवन सीखने’ की प्रवृत्ति अपनाएं। जितना अधिक आप नकारात्मकता को कम करने में सक्षम होंगे, उतना अधिक आप खुद को संतुष्ट कर पाएंगे।