Calcutta High Court : कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा कि वह देश में उच्च स्तरीय वैज्ञानिकी और तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों के हितों के बारे में चिंतित है। पश्चिम बंगाल की शीर्ष अदालत ने कहा कि वह आईआईटी, खड़गपुर के निदेशक से अपने छात्रावास में थर्ड ईयर मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र की अप्राकृतिक मौत के मामले को लेकर कड़े कदम उठाने की अपेक्षा करता है। रैगिंग के आरोपों को ध्यान में रखते हुए, अदालत ने निर्देश दिया कि जमीनी स्तर पर शुरू होने वाले उचित काउंसलिंग सत्र सुनिश्चित किए जाएं और इसे लागू करने के लिए आईआईटी खड़गपुर के निदेशक व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।
आईआईटी, खड़गपुर के निदेशक प्रोफेसर वीरेंद्र कुमार तिवारी, मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र फैजान अहमद के पिता सलीम अहमद की एक याचिका के संबंध में निर्देशानुसार अदालत में मौजूद थे। छात्र का शव पिछले साल 14 अक्तूबर, 2022 को संस्थान के छात्रावास के कमरे में पाया गया था। असम के तिनसुकिया जिले के रहने वाले अहमद अपने बेटे की अस्वाभाविक मौत की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन की मांग कर रहे हैं।
जस्टिस राजशेखर मंथा ने शुक्रवार को आदेश में कहा, यह उम्मीद की जाती है कि इस घटना के संबंध में आईआईटी, खड़गपुर द्वारा कड़े कड़े और निवारक उपाय किए जाएंगे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को भी रोका जा सकेगा। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी विज्ञान की शिक्षा प्रदान करने वाले प्रमुख संस्थान के छात्रों की भलाई पर चिंता व्यक्त करते हुए अदालत ने कहा कि विभिन्न आर्थिक और सामाजिक पृष्ठभूमि और अलग-अलग भावनात्मक गुण वाले बड़ी संख्या में बेहतर बौद्धिक क्षमता वाले छात्र यहां आते हैं।
अदालत ने पाया कि ये अंतर छात्रों के आचार-विचार को प्रभावित करते हैं। कभी-कभी उनकी स्वतंत्र अभिव्यक्ति और बातचीत को प्रतिबंधित करते हैं। जस्टिस मंथा ने कहा कि किसी भी प्रकार की रैगिंग की घटना ऐसे छात्रों के लिए जिंदगी को और भी बदतर बना देती है। अदालत ने कहा कि यह अलग-अलग समय के लिए पीड़ित छात्रों को मनोवैज्ञानिक रूप से डरा सकता है। अदालत ने राज्य पुलिस को निर्देश दिया कि वह लिखित रिपोर्ट या मौखिक रूप से छह फरवरी को जांच की स्थिति से अदालत को अवगत कराएं। वहीं, आईआईटी के निर्देशों के अनुपालन पर 13 फरवरी को सुनवाई के दौरान विचार किया जाएगा।