केस नंबर-1: गेम खेलने से मैं फेल हो जाऊंगा, लेकिन लत लग चुकी है
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के रामगंगा विहार निवासी 12वीं का छात्र को वीडियो गेम खेलने की लत है। काउंसलिंग में उसने बताया कि चाहे मोबाइल हो या फिर कंप्यूटर मैं वीडियो गेम खेलता रहता हूं। मोबाइल से वाई-फाई ऑन कर लैपटॉप पर गेम खेलता हूं। मुझे पता है कि मेरे अंक कम आएंगे या फेल हो जाऊंगा। मुझे थोड़ी देर गेम खेलने का मौका नहीं मिलता तो बेचैनी होने लगती है और चिड़चिड़ा हो जाता हूं। एक बार पापा ने गुस्से में लैपटॉप तोड़ दिया, लेकिन मेरी तबीयत खराब होती देख कर उन्होंने दूसरा दिलवा दिया। अब बोर्ड परीक्षाओं को लेकर भी डर लग रहा है।
केस नंबर-2: पढ़ाई में मन एकाग्र नहीं हो पा रहा, क्या करूं?
मंडी चौक निवासी कक्षा 12वीं का छात्र बोर्ड परीक्षा की तैयारी के साथ आईआईटी की कोचिंग भी कर रहा है। वह संयुक्त परिवार में रहता है। छात्र ने बताया कि बोर्ड परीक्षा में अच्छे नंबर लाने का दबाव है और आईआईटी में भी सफलता पाने की उसको चिंता है। जब वह पढ़ने बैठता है तो परिजन उसे घरेलू कार्य बता देते हैं, जिससे वह पढ़ाई में एकाग्र नहीं हो पाता है। घर में ज्यादातर वही खाना बनता है, जो उसे पसंद नहीं है, लेकिन अन्य परिजनों की वजह से वह कुछ कह नहीं पाता है। ताऊ-ताई व बड़े भाई-बहन हमेशा तैयारी कैसी चल रही है, यही कहते रहते हैं। समय प्रबंधन न कर पाने के कारण अपनी पढ़ाई में खुद को पिछड़ता महसूस कर रहा है। वह खुद को कुंठित और निराश महसूस करता रहता है।
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केस संख्या-3: मुझे क्रिकेट का शौक है और भाई को पढ़ने का, घर वाले तुलना करते हैं
बुद्धि विहार निवासी कक्षा 10वीं के छात्र ने बताया कि उसको क्रिकेट का शौक है। वह स्कूल के अलावा चार से पांच घंटे का समय खेल पर दे रहा है। उसके बड़े भाई ने बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त किए हैं। अब माता-पिता बड़े भाई से उसकी तुलना कर रहे हैं, जिसकी वजह से वह पढ़ाई से और दूर हो रहा है। पढ़ाई का नाम सुनते ही वह गुस्सा हो जाता है और खाना खाना कम कर देता है। अक्सर अपने बड़े भाई से अपनी तुलना किए जाने को लेकर परेशान रहता है।
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