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लॉ कॉलेजों के लिए जरूरी नोटिस: मान्यता रिन्यूअल की अंतिम तिथि 31 जुलाई, जल्द करें आवेदन; जानें सभी नियम

Tue, 14 Jul 2026 07:06 PM IST
Akash Kumar एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

BCI: बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने देशभर के कानूनी शिक्षा प्रदान करने वाले सभी मौजूदा संस्थानों के लिए जरूरी नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में मौजूदा कानून पाठ्यक्रमों और स्वीकृत सीटों के लिए मान्यता विस्तार या नवीनीकरण से जुड़ी आवेदन प्रक्रिया पूरी करने का अंतिम मौका दिया गया है।
 
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बार काउंसिल ऑफ इंडिया - फोटो : Official Website (allindiabarexamination.com/)
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विस्तार
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BCI: बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने देशभर के विश्वविद्यालयों, विधि विभागों, लॉ कॉलेजों और कानूनी शिक्षा प्रदान करने वाले अन्य सभी मौजूदा संस्थानों के लिए अहम निर्देश जारी किए हैं। परिषद ने कहा है कि जो संस्थान अपने मौजूदा कानून पाठ्यक्रमों, सेक्शन और स्वीकृत प्रवेश क्षमता को जारी रखना चाहते हैं, उन्हें 31 जुलाई 2026 तक हर हाल में आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

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बीसीआई ने यह फैसला आगामी प्रवेश प्रक्रिया में किसी तरह की बाधा को रोकने और कानून की पढ़ाई करने वाले छात्रों के हितों की रक्षा के लिए लिया है।

कई संस्थानों ने अभी तक पूरा नहीं किया आवेदन

बीसीआई के अनुसार, कई संस्थानों ने या तो अभी तक जरूरी आवेदन जमा नहीं किए हैं या फिर आवेदन प्रक्रिया शुरू करने के बावजूद उसे पूरा नहीं किया है।

कई मामलों में संस्थानों ने जरूरी दस्तावेज अपलोड नहीं किए, आवश्यक जानकारी नहीं भरी, निर्धारित शुल्क जमा नहीं किया या फिर पोर्टल और ईमेल के माध्यम से बताई गई कमियों को दूर नहीं किया।

परिषद ने स्पष्ट किया है कि केवल पोर्टल पर पंजीकरण करना, आवेदन संख्या प्राप्त कर लेना, कुछ दस्तावेज अपलोड करना या आंशिक शुल्क जमा करना आवेदन पूरा माना नहीं जाएगा।

आवेदन कब माना जाएगा पूरा?

बीसीआई के अनुसार आवेदन तभी पूर्ण माना जाएगा, जब संस्थान:
  • सभी जरूरी दस्तावेज अपलोड कर दें।
  • आवेदन में मांगी गई सभी जानकारी उपलब्ध करा दें।
  • निर्धारित शुल्क का पूरा भुगतान कर दें।
  • आवेदन का अंतिम सबमिशन कर दें।
  • पोर्टल या ईमेल के जरिए बताई गई सभी कमियों को समय रहते दूर कर दें।

31 जुलाई तक दूर करनी होंगी सभी कमियां

परिषद ने कहा है कि पोर्टल, पंजीकृत ईमेल, आधिकारिक पत्र या किसी अन्य अधिकृत माध्यम से बताई गई सभी कमियों को 31 जुलाई 2026 तक दूर करना होगा।

इसके लिए संस्थानों को नियमित रूप से अपने पोर्टल डैशबोर्ड और पंजीकृत ईमेल की निगरानी करने की सलाह दी गई है।

यह मौका किन संस्थानों के लिए है?

बीसीआई ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा केवल उन संस्थानों के लिए है जो पहले से चल रहे कानून पाठ्यक्रमों, सेक्शन और स्वीकृत प्रवेश क्षमता के लिए मान्यता विस्तार या नवीनीकरण चाहते हैं। यह अवसर निम्न मामलों पर लागू नहीं होगा:
  • नया कानूनी शिक्षा संस्थान स्थापित करने के लिए।
  • नया कानून पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए।
  • अतिरिक्त सेक्शन या अतिरिक्त सीटों की मंजूरी लेने के लिए।

ऐसे मामलों में अलग से अनुमति और प्रक्रिया लागू होगी।

50 हजार रुपये की देनी होगी पंजीकरण फीस

बीसीआई की निर्धारित शुल्क व्यवस्था के अनुसार, प्रत्येक कानूनी शिक्षा संस्थान को एकमुश्त 50 हजार रुपये का पोर्टल पंजीकरण शुल्क जमा करना होगा। यह शुल्क वापस नहीं किया जाएगा।
 
शुल्क का प्रकार राशि
एकमुश्त पोर्टल पंजीकरण शुल्क 50,000 रुपये
शुल्क वापसी नहीं होगी

आवेदन लंबित होने पर भी नहीं ले सकेंगे दाखिला

परिषद ने साफ किया है कि कोई भी संस्थान केवल आवेदन जमा करने या आवेदन विचाराधीन होने के आधार पर यह दावा नहीं कर सकता कि उसके कोर्स को मंजूरी मिल चुकी है।

इसी तरह कोई संस्थान ऐसे कोर्स, सेक्शन या सीटों पर प्रवेश नहीं ले सकेगा, जिनके लिए बीसीआई की वैध या अस्थायी मंजूरी मौजूद नहीं है।

दाखिले के लिए क्या जरूरी होगा?

बीसीआई के अनुसार प्रवेश केवल उन्हीं पाठ्यक्रमों, सेक्शन और सीटों पर किए जा सकेंगे, जिनके पास:
  • बार काउंसिल ऑफ इंडिया की वैध या अंतरिम मंजूरी हो।
  • संबंधित विश्वविद्यालय की वैध संबद्धता मौजूद हो।
  • विश्वविद्यालयों को भी दी गई जिम्मेदारी

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने विश्वविद्यालयों को भी निर्देश दिया है कि वे अपने संबद्ध सभी कानूनी शिक्षा संस्थानों तक यह सूचना तुरंत पहुंचाएं।

इसके साथ ही विश्वविद्यालयों को यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है कि उनके संबद्ध संस्थान निर्धारित समयसीमा के भीतर आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।

31 जुलाई के बाद बंद हो जाएगी आवेदन विंडो

बीसीआई ने साफ कर दिया है कि 31 जुलाई 2026 के बाद आवेदन जमा करने वाले संस्थानों के आवेदन सामान्य परिस्थितियों में स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

केवल बेहद विशेष और उचित कारणों वाली परिस्थितियों में ही बार काउंसिल ऑफ इंडिया का सक्षम प्राधिकारी इस पर अलग निर्णय ले सकेगा।

परिषद ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी संस्थान को अतिरिक्त समय दिए जाने का कोई अधिकार स्वतः प्राप्त नहीं होगा।
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समय पर आवेदन नहीं करने पर क्या होगा?

यदि कोई कानूनी शिक्षा संस्थान निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन जमा नहीं करता है, तो उसे अंतिम अवसर का उपयोग नहीं करने वाला माना जाएगा।

ऐसी स्थिति में संबंधित संस्थान मौजूदा पाठ्यक्रमों, सेक्शन और स्वीकृत सीटों के लिए मान्यता जारी रखने या उसके नवीनीकरण का दावा नहीं कर सकेगा। साथ ही वह संबंधित शैक्षणिक सत्र में प्रवेश प्रक्रिया भी नहीं चला पाएगा।

बीसीआई ने कहा है कि ऐसी स्थिति में छात्रों को होने वाले नुकसान सहित सभी परिणामों की जिम्मेदारी संबंधित संस्थान और विश्वविद्यालय की होगी।
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