विधेयक के मुख्य बिंदु
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पंजीकरण अनिवार्य – सभी पुराने और नए कोचिंग संस्थानों को तय समय सीमा के अंदर पंजीकरण कराना होगा।
- स्पष्ट परिभाषाएं – "कोचिंग संस्थान", "ट्यूटर" और "पंजीकरण" जैसे शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।
- आवेदन प्रक्रिया – संस्थानों को पाठ्यक्रम, समय-सारणी, फीस, आधारभूत संरचना और शिक्षकों की योग्यता की जानकारी देनी होगी।
- संचालन के नियम – सुरक्षा मानकों का पालन, योग्य शिक्षकों की नियुक्ति और छात्रों के लिए पर्याप्त सुविधाएं अनिवार्य होंगी। साथ ही, गलत दावे करने पर रोक होगी।
- आचार संहिता – फीस और छात्रों के परिणामों में पारदर्शिता जरूरी होगी। मानसिक स्वास्थ्य कार्यशालाओं और काउंसलिंग को अनिवार्य बनाया गया है।
- समावेशिता – हाशिए पर रहने वाले समूहों को सहायता और विकलांग छात्रों के लिए अनुकूल सुविधाएं देनी होंगी।
- निगरानी और दंड – जिला प्रशासन को निरीक्षण और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करने का अधिकार होगा।
- अपील की प्रक्रिया – पंजीकरण और नियमों के पालन से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए एक अपीलीय निकाय बनाया जाएगा।
निजी विश्वविद्यालयों पर नया संशोधन विधेयक
इसके अलावा, असम सरकार ने "असम निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2025" भी विधानसभा में पेश किया। इस विधेयक में निजी विश्वविद्यालयों के लिए कुछ सख्त नियम तय किए गए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- विश्वविद्यालयों के प्रायोजक संस्थानों के लिए अनिवार्य सुरक्षा मंजूरी।
- धार्मिक रूपांतरण से जुड़े किसी भी प्रकार के कार्य पर प्रतिबंध।
- नए तकनीकी और चिकित्सा पाठ्यक्रमों को खोलने पर प्रतिबंध।
- हर तीन साल में सरकारी निरीक्षण।
राज्य में नए विश्वविद्यालयों की स्थापना
असम सरकार ने राज्य विधानसभा में तीन नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना से जुड़े विधेयक भी पेश किए। ये विश्वविद्यालय हैं:
- मा कामाख्या विश्वविद्यालय (दर्रांग)
- एडटेक स्किल विश्वविद्यालय (तिनसुकिया)
- स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय (बीटीआर)
इसके अलावा, असम सरकार ने बोंगाईगांव, गुरुचरण, जगन्नाथ बारुआ, नागांव, उत्तर लखीमपुर, शिवसागर, शहीद कनकलता बारुआ और कोकराझार विश्वविद्यालयों के लिए संशोधन विधेयक भी पेश किया। इन संशोधनों के तहत नए विश्वविद्यालयों के पहले कुलपति (Vice Chancellor) की नियुक्ति राज्य सरकार करेगी। बाद में, यह नियुक्ति राज्यपाल की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा की जाएगी।