ASER Report: प्रत्येक चार वर्ष में होता है सर्वे
ASER यानी शिक्षा की वार्षिक स्थिति पर रिपोर्ट एक राष्ट्रव्यापी, नागरिक-नेतृत्व वाला घरेलू सर्वेक्षण है जो ग्रामीण भारत में बच्चों की स्कूली शिक्षा और सीखने का परिदृश्य उजागर करता है। पहला एएसईआर सर्वेक्षण 2005 में आयोजित किया गया था। एएसईआर 2022 चार साल के अंतराल यानी 2018 के बाद पहला सर्वेक्षण है। यह ऐसे समय में आया है जब बच्चे COVID-19 महामारी के एक बड़े अंतराल के बाद स्कूल वापस आने लगे हैं।
ASER Report: कहां कैसी गिरावट ज्यादा?
एएसईआर रीडिंग टेस्ट ने मूल्यांकन किया कि क्या कोई बच्चा कक्षा एक के कठिनाई स्तर पर अक्षर, शब्द और एक साधारण पैराग्राफ पढ़ सकता है, या कक्षा दो के कठिनाई स्तर पर 'कहानी' पढ़ सकता है। टेस्ट सैंपल घरों में पांच से 16 वर्ष के आयु वर्ग के सभी बच्चों के लिए एक-एक करके लिया गया था। इसमें सामने आया कि राष्ट्रीय स्तर पर, बच्चों की बुनियादी पढ़ने की क्षमता 2012 के पूर्व के स्तर तक गिर गई है, जो बीच के वर्षों में हासिल किए गए धीमे सुधार को उलट देती है। इससे पता चला है कि अधिकांश राज्यों में सरकारी और निजी स्कूलों में लड़कों और लड़कियों दोनों के लिए गिरावट देखने को मिली है। जहां पढ़ने की क्षमता में सबसे ज्यादा गिरावट केरल, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में देखी गई है, वहीं गणित कौशल में गिरावट तमिलनाडु, मिजोरम और हरियाणा में देखी गई है।
ASER Report: कक्षा तीन के लिए आंकड़े में सात फीसदी की गिरावट
सरकारी या निजी स्कूलों में कक्षा तीन के बच्चों का प्रतिशत 2018 में 27.3 फीसदी से गिरकर 2022 में 20.5 फीसदी हो गया, जो कक्षा दो के स्तर पर पढ़ सकते हैं। यह गिरावट हर राज्य में और सरकारी और निजी दोनों स्कूलों में बच्चों के लिए दिखाई दे रही है। वहीं, 2018 के स्तर से 10 फीसदी से अधिक की गिरावट दिखाने वाले राज्यों में केरल (2018 में 52.1 फीसदी से 2022 में 38.7 फीसदी), हिमाचल प्रदेश (47.7 फीसदी से 28.4 फीसदी), और हरियाणा (46.4 फीसदी से 31.5 फीसदी) शामिल हैं।
ASER Report: नामांकित बच्चों के अनुपात के आधार पर
वहीं, सरकारी या निजी स्कूलों में कक्षा पांच में नामांकित बच्चों का अनुपात जो कि कम से कम कक्षा दो के स्तर का पाठ पढ़ सकते हैं, वो 2018 के 50.5 फीसदी से गिरकर 2022 में 42.8 फीसदी रह गया। जिन राज्यों में यह संकेतक स्थिर रहा या उनमें मामूली सुधार हुआ, इनमें बिहार, ओडिशा, मणिपुर और झारखंड आदि शामिल हैं। वहीं, 15 प्रतिशत अंकों या उससे अधिक की कमी वाले राज्यों में आंध्र प्रदेश, गुजरात और हिमाचल प्रदेश (76.9 प्रतिशत से 61.3 प्रतिशत) शामिल हैं। जबकि उत्तराखंड, राजस्थान, हरियाणा, कर्नाटक और महाराष्ट्र में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी जा सकती है।
ASER Report: आठवीं के छात्रों में बुनियादी पढ़ने की क्षमता में कमी
रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि कक्षा आठवीं के छात्रों में बुनियादी पढ़ने की क्षमता में कमी दिखाई दे रही है, लेकिन ये कक्षा तीन और पांच में देखे गए रुझानों की तुलना में कम हैं। राष्ट्रीय स्तर पर, सरकारी या निजी स्कूलों में कक्षा आठ में नामांकित 69.6 प्रतिशत बच्चे 2022 में कम से कम बुनियादी पाठ पढ़ सकते हैं, जो 2018 में 73 प्रतिशत था। रिपोर्ट के अनुसार, देश भर में अधिकांश ग्रेड के लिए बच्चों के बुनियादी अंकगणितीय स्तर में 2018 के स्तर में गिरावट आई है। लेकिन बुनियादी पढ़ने के मामले की तुलना में गिरावट कम तेज है और तस्वीर अधिक विविध है।
ASER Report: जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के स्तर में सुधार
कक्षा तीन के बच्चों के लिए जो कम से कम घटाव कर सकते हैं, 2018 में 28.2 प्रतिशत से गिरकर 2022 में 25.9 प्रतिशत हो गया। जबकि जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश ने 2018 के स्तर को बनाए रखा या थोड़ा सुधार किया। उधर, तमिलनाडु में 10 फीसदी से अधिक की भारी गिरावट दिखाई दे रही है और हरियाणा में 53.9 फीसदी से गिरकर 41.8 फीसदी रह गया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बुनियादी अंकगणित में कक्षा आठवीं के छात्रों का प्रदर्शन अधिक विविध है। जो कि 2018 के 44.1 प्रतिशत से थोड़ा बढ़ कर 2022 में 44.7 प्रतिशत हो गया है। यह वृद्धि लड़कियों के साथ-साथ सरकारी स्कूलों में नामांकित बच्चों के बीच बेहतर परिणामों से प्रेरित है। सरकारी स्कूल में कक्षा आठवीं के बच्चों ने 2022 में उत्तर प्रदेश में जो 32 फीसदी से बढ़कर 41.8 फीसदी और छत्तीसगढ़ 2018 की तुलना में 10 फीसदी काफी बेहतर किया, लेकिन पंजाब में 10 फीसदी खराब रहा।