AMIMUN'22: यूएनएचआरसी की डमी बैठक
AMIMUN'22 कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (यूएनएचआरसी) की डमी बैठक से पहले इसके क्रियान्वयन और नियम आदि पर चर्चा की गई। इसमे संवाद के तरीके, समय-सीमा, राईट टू रिप्लाई और वोटिंग के तरीकों पर चर्चा हुई। इसके बाद छात्रों ने उन्हें दिए गए देशों के डेलिगेट के पदों के अनुसार अपनी चर्चाए आरंभ की। इस चर्चा का विषय मानवाधिकारों का सार्वभौमिक संरक्षण और COVID-19 के खिलाफ क्षमता निर्माण के लिए तकनीकी सहयोग में वृद्धि था।
विएतनाम की प्रतिनिधि ने की सत्र की शुरुआत
सत्र की शुरुआत विएतनाम के प्रतिनिधि ने की। उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान शिक्षा की बुरी स्थिति के बारे में बात की और शिक्षा के अधिकार पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि कोरोना के दौर में बच्चों की शिक्षा पर बुरा असर पड़ा है। इसके बाद नाईजीरिया के प्रतिनिधि ने देश में मानवाधिकारों के उल्लंघन की बात कही। उन्होंने कोरोना महामारी का हवाला देते हुए कहा कि महामारी के कारण देश में भूखमरी के हालात पैदा होने लगे हैं। उन्होंने वैक्सीन की जरुरत और रंग भेद को के खिलाफ भी सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि दुनिया को जल्द से जल्द सहयोग के कदम को बढ़ाने की जरूरत है।
यूके ने की अपने कार्यों चर्चा
बैठक में यूनाइटेड किंगडम के प्रतिनिधि ने कोरोना के दौर में देश द्वारा किए गए सहयोग कार्यों की चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि यूके ने कोरोना काल में शर्णार्थियों की काफी मदद की है। विभिन्न देशों को साल 2022 तक कोरोना वैक्सीन की 30 मिलियन डोज वितरित करना का भी लक्ष्य है। उन्होंने वैक्सीन की आसान पहुंच, ऑक्सीजन सप्लाई और शर्णार्थियों को मदद की बात पर जोर दिया।
श्रीलंका ने मानवाधिकारों के हनन का आरोप लगाया
मॉडल यूनाइटेड नेशंस में श्रीलंका के प्रतिनिधि ने देश में मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकारी की ओर से मानवाधिकारों का बड़े स्तर पर उल्लंघन जारी है। पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को परेशान किया जा रहा है। वहीं, कोरोना कर्फ्यू के नाम पर अवैद्य तरीके से गिरफ्तारी का मुद्दा भी उठाया। इसके बाद इंडोनेशिया के प्रतिनिधि ने कोरोना महामारी के दौरान देश की सरकार की ओर से किए गए राहत कार्यों की चर्चा की। उन्होंने दुनियाभर में एशियन लोगों के साथ हो रहे भेदभाव और बढ़ते इस्लामोफोबिया का विरोध किया। उन्होंने अनेक देशों द्वारा लगाए जा रहे ट्रैवल बैन का भी विरोध किया।
AMIMUN'22: नीति आयोग की डमी बैठक में उठा बिजली संकट और नवीन ऊर्जा का मुद्दा
एमिटी इंटरनेशनल मॉडल यूनाइटेड नेशंस (AMIMUN'22) के दौरान नीति आयोग की डमी बैठक में छात्रों ने विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, सासंदों और केंद्रीय मंत्रियों के रोल प्ले किए और अपने वक्तव्य रखे। इस बैठक में बिजली संकट, हरित ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े मुद्दे छाए रहे। बैठक में वक्ताओं में सियासी तकरार भी देखने को मिली। सत्ता पक्ष के जुड़े मुख्यमंत्रियों ने उपलब्धियों का बखान किया तो विपक्षी दलों से संबंधित मुख्यमंत्रियों ने योजनाओं पर सियासी सवाल उठाए और सरकार एवं मंत्रियों को घेरा। आयोजकों की ओर से बैठक में सभी प्रतिभागियों को अपना एजेंडा रखने के लिए एक निश्चित समय दिया गया था। वक्ताओं द्वारा अपना एजेंडा और विचार प्रस्तुत करने के बाद अन्य प्रतिभागियों ने उनसे सवाल-जवाब भी किए।
राष्ट्रीय उत्तर दायित्व, पर्यावरण की चिंता का बोध झलका
एमिटी इंटरनेशनल मॉडल यूनाइटेड नेशंस कार्यक्रम के तहत नीति आयोग की डमी बैठक में छात्रों में नेताओं के राष्ट्रीय उत्तर दायित्व और पर्यावरण की चिंता का बोध झलका। जहां पूर्वोत्तर के एक राज्य के मुख्यमंत्री की भूमिका निभा रहे छात्र ने ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली का मुद्दा उठाया और अपनी सरकार की योजनाओं की जानकारी दी। तो वहीं दूसरे राज्य के सीएम ने अवैध खनन का मुद्दा उठाते हुए सरकार को घेरा। वहीं, इस डमी बैठक में एक अन्य राज्य की मुख्यमंत्री की भूमिका निभाते हुए छात्रा ने नवीन ऊर्जा की बात करते हुए तीन मुद्दे उठाए। उन्होंने राष्ट्रीय उत्तर दायित्व, पर्यावरण की चिंताओं को उठाया और राज्य में सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों के संचालन के प्रयासों के बारे में बताया। संबंधित विपक्षी नेताओं के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कोयले की कमी को लेकर केंद्र सरकार पर पलटवार भी किया।
एक-दूसरे के तर्कों पर हुआ पलटवार
AMIMUN'22 के तहत नीति आयोग की काल्पनिक बैठक में एक सांसद का रोल प्ले करते हुए छात्र ने आधुनिक जीवनशैली के आधार पर बिजली उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दिया। डमी सांसद ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत बढ़ाने पर मिलकर काम करना होगा। एक राज्य के मुख्यमंत्री ने मानव संसाधन की कमी का मुद्दा उठाया। साथ ही कहा कि 24 घंटे बिजली सेवाएं देना आज की जरूरत है। सरकार को संसद में राष्ट्रीय ऊर्जा नीति पेश करनी चाहिए। डमी बैठक में एक केंद्र सरकार के सबसे ताकतवर मंत्री की भूमिका निभा रहे छात्र ने कहा कि हाल ही में राजधानी में बिजली संकट गहरा गया था। उससे बचने के लिए आप की सरकार ने क्या प्रावधान किए। इस पर मुख्यमंत्री ने राजधानी में सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देने की बात कही।
छात्रों का इलेक्ट्रिक व्हीकल नीति को बढ़ावा देने पर जोर
नीति आयोग की डमी बैठक में एक केंद्रीय मंत्री की भूमिका में छात्र ने कहा कि देश अपनी ईंधन जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। बायोफ्यूल का उत्पादन अभी शुरुआती स्तर पर ही है। हमें इलेक्ट्रिक व्हीकल नीति को बढ़ावा देना होगा। बायोफ्यूल का उत्पादन बढ़ाने के प्रयास करने होंगे। उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर आयकर में छूट देने की बात कही। वहीं दूसरे केंद्रीय मंत्री की भूमिका में छात्र ने कहा कि वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत बढ़ाने की जरूरत है। गुजरात में कच्छ पवन ऊर्जा का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। हमारी सरकार इसी तर्ज पर सोलर ऊर्जा को भी बढ़ावा दे रही है। वहीं, पूर्वोत्तर राज्य के एक सांसद का रोल प्ले कर रहे छात्र ने आरोप लगाए कि सरकार ने कई घोषणाएं कीं, लेकिन वे सब पुरानी ही थी, कुछ नया नहीं किया। पूर्वोत्तर की ऊर्जा जरूरतों पर ध्यान नहीं दिया।