ट्रेनिंग प्रोग्राम 8 मॉ़ड्यूल्स पर आधारित होगा। 6 महीने में भावी शिक्षकों को पढ़ाने की कला, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, प्रयोगशाला, रिसर्च, लीडरशिप, लेसन प्लान, कंप्यूटर आधारित प्रशिक्षण दिये जाएंगे। ट्रेनिंग के दौरान शिक्षकों को आधा वेतन दिये जाने की बात कही गई है। वहीं, ट्रेनिंग कराने की जिम्मेदारी भी संबंधित संस्थान की होगी।
बता दें कि AICTE सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू कर चुका है। परिषद द्वारा जारी अधिकारिक निर्देशों के अनुसार वेतन भत्ते बढ़ाने के साथ-साथ शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
स्टूडेंट्स के फीडबैक होंगे तरक्की का आधार
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, एकेडेमिक परफॉर्मेंस इंडीकेटर (API) स्कोर के आधार पर शिक्षकों का प्रमोशन होता था। लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, नई व्यवस्था में स्टूडेंट्स से टीचर्स का फीडबैक लिया जाएगा। उनके फीडबैक के आधार पर ही शिक्षकों का प्रमोशन तय होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि API स्कोर में शिक्षक क्लास से ज्यादा कॉन्फ्रेंस, सेमिनार और प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त हो जाते थे।