दरअसल, एआईसीटीई ने इस वर्ष की शुरुआत में अंडरग्रेजुएट इंजीनियरिंग छात्रों का एक सर्वेक्षण किया था। जिसमें लगभग आधे (43.79%) छात्रों ने कहा कि वे क्षेत्रीय भाषाओं में अध्ययन करना चाहते हैं। यह सर्वेक्षण देशभर के कुल 83,195 छात्रों पर किया गया था। एआईसीटीई के सर्वेक्षण के अनुसार, तमिल, हिंदी और तेलुगु में क्रमश: 12,487, 7,818 और 3,991 छात्र पढ़ना चाहते हैं।
सर्वेक्षण के बाद, तकनीकी शिक्षा को मातृभाषा में प्रदान करने के लिए एक समिति का गठन किया गया था। प्रो. प्रेम व्रत की अध्यक्षता वाली समिति ने सिफारिश की कि छात्रों को एनआईटी/आईआईटी और एआईसीटीई द्वारा अनुमोदित संस्थानों में क्षेत्रीय भाषाओं में इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों का अध्ययन करने के लिए विकल्प उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
जबकि आईआईटी अभी तक कई कारणों का हवाला देते हुए क्षेत्रीय भाषाओं में पाठ्यक्रम देने पर सहमत नहीं हुए हैं। वहीं नौ राज्यों के कुल 14 कॉलेजों ने क्षेत्रीय भाषाओं में इंजीनियरिंग कार्यक्रम पेश करने में रुचि व्यक्त की है। इसमें बी टेक कंप्यूटर साइंस, आईटी, मैकेनिकल, सिविल, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल हैं।
क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ने वाले छात्रों के लिए अंग्रेजी अनिवार्य विषय होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक छात्रों को सभी चार वर्षों में एक अनिवार्य अंग्रेजी पाठ्यक्रम लेना होगा ताकि वे अंग्रेजी भाषा में आवश्यक कौशल हासिल कर सकें और दुनिया के किसी भी हिस्से में रोजगार पाने में सक्षम हों।