अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद यानी एआईसीटीई ने देश के इंजीनियरिंग कॉलेजों और अन्य तकनीकी संस्थानों को निर्देशित किया है कि वे फैकल्टी द्वारा स्थापित स्टार्ट-अप के लिए "कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट" नीति का मसौदा तैयार करें।
तकनीकी संस्थानों में मानव संसाधन विकास (HRD) मंत्रालय के तकनीकी शिक्षा नियामक हाल ही में छात्रों के स्टार्ट-अप के लिए एक नीति लेकर आए थे। हालांकि, कैंपस में जो फैकल्टी स्टार्ट-अप में शामिल हैं उनके लिए नियम बनाएं, कि उन्हें क्या करना है और क्या नहीं करना है।
कुछ दिनों पहले छात्रों के स्टार्ट-अप के लिए बनाई गई नीति के अनुसार, स्टार्ट-अप संबंधित गतिविधियों में फैकल्टी की भागीदारी को वैध माना जाएगा। यह शिक्षण, रिसर्च और डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स, इंडस्ट्रियल कंसल्टेंसी और प्रबंधन कर्तव्यों के अतिरिक्त होगा। फैकल्टी के वार्षिक प्रदर्शन का मूल्यांकन करते समय इन क्षेत्रों में उनकी गतिविधियों को शामिल किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार AICTE के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि फैकल्टी के लिए स्टार्ट-अप्स चलाने के मानदंड बनाए जाने चाहिए, जिससे उद्यमशीलता गतिविधियों को बेहतर बनाया जा सके।
संस्थानों को 'कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट' फैकल्टी के अपने स्टार्ट अप के लिए बनाने के लिए कहा गया है। एआईसीटीई ने कहा है कि, " 'कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट ऐसे नियम बनाएं जाएं जिससे फैकल्टी के स्टार्ट अप में शामिल होने के कारण उनकी प्राथमिक कर्तव्य प्रभावित न हो।
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