नगर निगम शिमला का एक बड़ा अफसर इन दिनों खासा चर्चा में है। पहले यह जनाब घर द्वार जाकर लोगों का हालचाल पूछते थे, खुद को जनता का सेवक बताते थे।
मगर अब साहब बनते ही जनता को भूल गए हैं। हालचाल पूछना तो दूर साहब किसी का फोन उठाना तक पसंद नहीं करते। फिर चाहे किसी की कोई दिक्कत हो या कोई शिकायत।
यही नहीं, विदेशों में जाने का नया शौक भी साहब को लग गया है। लोग अपनी फरियादें लेकर दफ्तर आते हैं लेकिन पता चलता है कि साहब विदेश गए हैं।
लोग कोसते हैं कि जिन पैसों से शहर में काम होना चाहिए उन पैसों से साहब मौज मस्ती कर रहे हैं।
चुनावों के समय इन जनाब ने कई बड़े वायदे किए थे। खैर मुसीबतें तो दूर नहीं हुई। हां ये जनाब मीठी मीठी बातें कर साहब जरूर बन गए।
आजकल फिर ये जनाब लोगों के बीच जाकर अपने दावेदार को जिताने के लिए पसीना बहा रहे हैं। मगर लोग इनकी चालाकी समझ गए हैं। तभी तो कुछ लोग कहने लगे हैं कि इन साहब की फितरत तो अपना काम बनता भाड़ में जाए जनता जैसी है।