प्रदेश के कुछ नेताओं पर लगे दुराचार के आरोपों से सियासत खूब गरमा गई। पहले कांग्रेस पर सवाल उठे। फिर चंद दिन बाद ही भाजपा का अपना दामन भी दागदार हो गया।
दोनों पार्टियां एक दूसरे के दामन को दागदार बताकर चुनाव में फायदा लेने की प्लानिंग कर रही थी। लेकिन जब दोनों के नेता ही आरोपी बने तो ये पार्टियां भी चुप हो गई।
सिरमौर में कांग्रेस विधायक का नाम सबसे पहले यौन शोषण मामले में सामने आया। भाजपा अभी इस मामले में कांग्रेस पर हमले की तैयारी ही कर रही थी कि उनका अपना पूर्व विधायक दागदार हो गया।
दोनों के पीछे पुलिस लगी है और ये दोनों खुद को बचाने के लिए पार्टी के आलाधिकारियों के पीछे। चुनाव में दोनों ही पार्टियां इस मुद्दे पर बात करने से हिचकिचा रही है। मगर छोटे दल इस बात को खूब भुना रहे हैं।
जनता बस यही कर रही है कि सारे नेता एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं। चुनाव आते ही रोटियां सेंकने लगते हैं। फिर चाहे पार्टी के नेता दुराचारी हो या फिर हत्यारे। सभी खुद को ईमानदार बताते फिरते हैं।