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जान जोखिम में डाल 5 घंटे ग्लेशियर पर चलकर श्रीखंड पहुंच रहे श्रद्धालु

Fri, 05 Jul 2019 01:50 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दलाश (कुल्लू)
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- फोटो : अमर उजाला
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अमरनाथ, केदारनाथ और कैलाश मानसरोवर से भी कठिन मानी जाने वाली श्रीखंड महादेव की यात्रा पर श्रद्धालु समय से पहले ही बिना पंजीकरण रवाना हो रहे हैं। 18570 फीट की ऊंचाई पर स्थित श्रीखंड महादेव के दर्शनों के लिए लोग जान जोखिम में डाल रहे हैं। बीते कुछ सालों में ही हादसों और ऑक्सीजन की कमी से तीन दर्जन से ज्यादा श्रद्धालुओं की मौतें हो चुकी हैं, लेकिन प्रशासन ने इन्हें रोकने का कोई प्रबंध नहीं किया है।

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आधिकारिक तौर पर यह यात्रा 15 से 25 जुलाई तक होगी। बीते दिनों किन्नर कैलाश की यात्रा के दौरान भी दो लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। बता दें कि अमरनाथ की यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को 14 हजार फीट की ऊंचाई पार करनी पड़ती है। 35 किलोमीटर की कठिनतम और जोखिम भरी यात्रा करके लौटे आनी उपमंडल के पूर्ण सक्सेना और शमशेर शमी ने बताया कि पार्वती बाग से आगे श्रीखंड तक पूरे रास्ते में अभी भी कई फीट ऊंची बर्फ है।

- फोटो : अमर उजाला
कई किलोमीटर तक बर्फ में रास्ते गायब हैं। भीम डवारी से कुछ आगे ग्लेशियर हैं। नैन सरोवर से जाने वाला रास्ता बर्फ में गायब है। इसके चलते उन्होंने पार्वती बाग से सीधा 5 घंटे तक का सफर ग्लेशियर में पैदल तय किया। इस वर्ष श्रीखंड यात्रा में दर्जनों ग्लेशियर बने हुए हैं। ये लोग 29 जून को निकले थे और 2 जुलाई को सकुशल घर लौट आए हैं।

एसडीएम आनी चेत सिंह ने श्रद्धालुओं से अपील की कि जान जोखिम में डालकर यात्रा न करें। प्रशासन की तय तिथि पर ही यात्रा करें, ताकि श्रद्धालुओं को पूरी सुविधा मिल सके और हादसे न हों। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान प्रशासन डाक्टरों की टीम के अलावा ऑक्सीजन सिलिंडर, पुलिस बल, रेस्क्यू दल और टेंट की सुविधा मुहैया करवाता है।
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- फोटो : अमर उजाला
मान्यता के अनुसार शिवजी से वरदान पाने वाले भस्मासुर को भगवान विष्णु ने यहां मोहिनी बनकर नृत्य के लिए राजी किया। जैसे ही भस्मासुर ने अपना हाथ सिर पर रखा और वह भस्म हो गया था। इसी कारण आज भी यहां की मिट्टी और पानी दूर से देखने पर लाल रंग की दिखाई देता है।

श्रीखंड महादेव की यात्रा के मार्ग में निरमंड में सात मंदिर, जाओ में माता पार्वती का मंदिर, परशुराम मंदिर, दक्षिणेश्वर महादेव, हनुमान मंदिर अरसु, जोताकली, बकासुर वध, ढंक द्वार समेत 72 फीट ऊंचा मुख्य प्राकृतिक शिवलिंग है।
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