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अदानी को 260 करोड़ अपफ्रंट मनी लौटाने से सरकार का इंकार

Fri, 05 Jul 2019 01:05 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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सीएम जयराम ने कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता की - फोटो : अमर उजाला
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जंगी थोपन पोवारी बिजली परियोजना मामले में जयराम सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है। बीते बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार ने अदानी कंपनी को अपफ्रंट मनी के 260 करोड़ नहीं लौटाने का फैसला लिया है। कंपनी पर वित्तीय बिड में स्वयं गलती करने का आरोप लगाते हुए मंत्रिमंडल ने यह फैसला लिया है। मुख्य सचिव बीके अग्रवाल ने इसकी पुष्टि की है कि अदानी को अपफ्रंट प्रीमियम नहीं लौटाने का फैसला लिया गया है। 

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वीरभद्र सरकार के समय हुई कैबिनेट बैठकों में भी अपफ्रंट मनी नहीं लौटाने की बात कही गई थी। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुई कैबिनेट बैठक के दौरान इस मामले को विड्रा कर दिया गया था। अब जयराम सरकार ने बीते कई वर्षों से लंबित इस प्रस्ताव को सिरे से ही खारिज कर दिया है।

मंत्रिमंडल में फैसला लिया गया कि जब सरकार की कोई गलती नहीं थी तो सरकारी पैसे से अपफ्रंट मनी क्यों दी जाए। 11 वर्षों से विवादों में रही 960 मेगावाट की जंगी थोपन पोवारी बिजली परियोजना को स्थापित करने के लिए वीरभद्र सरकार ने खूब जोर लगाया था लेकिन इस बाबत अंतिम निर्णय नहीं होने के चलते मामला लटक गया था। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होते ही जयराम सरकार ने इस परियोजना को एसजेवीएन को सौंप दिया है।

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पूर्व सरकार ने यह लिया था फैसला

जंगी थोपन पोवारी बिजली परियोजना मामले पर वीरभद्र सरकार ने फैसला किया था कि इस परियोजना का निर्माण रिलायंस कंपनी करेगी। रिलायंस कंपनी से जो अपफ्रंट मनी आएगी, उसे अदानी कंपनी को वापस लौटाया जाएगा। 15 सितंबर 2016 को रिलायंस कंपनी ने परियोजना निर्माण से इंकार कर दिया। उसके बाद सरकार ने इस परियोजना को पीएसयू सेक्टर में देने का फैसला लिया था। 

2006 में हुआ था टेंडर
साल 2006 में राज्य सरकार ने इस प्रोजेक्ट का टेंडर किया था। ब्रेकल कंपनी को काम आवंटित हुआ था। ब्रेकल ने अदानी से अपफ्रंट मनी के 260 करोड़ की राशि लेकर हिमाचल सरकार को दी। मामला बाद में सुप्रीम कोर्ट तक चला गया था। कोर्ट ने सरकार को इस प्रोजेक्ट पर अपने स्तर पर फैसला लेने के निर्देश दिए थे। सरकार ने 2009 में इस प्रोजेक्ट के आवंटन को रद्द कर दिया था।
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