जंगी थोपन पोवारी बिजली परियोजना मामले पर वीरभद्र सरकार ने फैसला किया था कि इस परियोजना का निर्माण रिलायंस कंपनी करेगी। रिलायंस कंपनी से जो अपफ्रंट मनी आएगी, उसे अदानी कंपनी को वापस लौटाया जाएगा। 15 सितंबर 2016 को रिलायंस कंपनी ने परियोजना निर्माण से इंकार कर दिया। उसके बाद सरकार ने इस परियोजना को पीएसयू सेक्टर में देने का फैसला लिया था।
2006 में हुआ था टेंडर
साल 2006 में राज्य सरकार ने इस प्रोजेक्ट का टेंडर किया था। ब्रेकल कंपनी को काम आवंटित हुआ था। ब्रेकल ने अदानी से अपफ्रंट मनी के 260 करोड़ की राशि लेकर हिमाचल सरकार को दी। मामला बाद में सुप्रीम कोर्ट तक चला गया था। कोर्ट ने सरकार को इस प्रोजेक्ट पर अपने स्तर पर फैसला लेने के निर्देश दिए थे। सरकार ने 2009 में इस प्रोजेक्ट के आवंटन को रद्द कर दिया था।