यमुना पुनरुद्धार के लिए बड़ी उम्मीदें
2026 तक यमुना सफाई का बड़ा चरण पूरा होने की उम्मीद है, जिसमें 40 किलोमीटर सीवेज ट्रीटमेंट लाइन बन सकती है। इसके लिए 500 करोड़ रुपये से अधिक आवंटित किए गए हैं। इसमें पुराने नालों की सफाई और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता बढ़ाने का काम होगा। सरकार का दावा है कि इससे यमुना में गिरने वाला गंदा पानी काफी हद तक कम होगा।
मेट्रो का विस्तार, 5000 ई-बसों का लक्ष्य
2026 में मेट्रो फेज-4 और 5 के प्रमुख रूट पूरे होने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे दिल्लीवासियों का सफर आसान हो सके। इसके साथ ही 5,000 ई-बसें सड़कों पर उतारने की योजना है। इससे प्रदूषण कम होगा और सार्वजनिक परिवहन को मजबूती मिलेगी। नए रूट और बेहतर फ्रीक्वेंसी से यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
महिला कल्याण योजनाएं जमीन पर लागू होंगी
सरकार ने महिलाओं के लिए 5,100 करोड़ रुपये की योजनाओं की घोषणा की है। उम्मीद है कि 2026 में महिला सम्मान राशि योजना पूरी तरह लागू होगी। महिलाओं को 2,500 रुपये तक की आर्थिक सहायता मिलने की बात कही गई है। इसके साथ ही आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूत किया जाएगा।
लैब में मिलेगी स्पेशल जांच की सुविधा
मरीजों को बेहतर जांच के लिए अत्याधुनिक लैब सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में नई जांच मशीनें लगाई जाएंगी, जिससे 100 से अधिक प्रकार की जांच की सुविधा मिलेगी। इससे मरीजों को निजी लैब पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
प्रदूषण की चुनौती कितना पार कर पाएंगे
2026 में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रदूषण की रहेगी। सर्दियों में हवा की गुणवत्ता सुधारना अब भी कठिन है। ई-बसों, इलेक्ट्रिक वाहनों और हरित क्षेत्रों के विस्तार से हालात बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है।
व्यापारी कल्याण बोर्ड से व्यापारियों को मिलेगी राहत
दिल्ली सरकार ने व्यापारी कल्याण बोर्ड के गठन की घोषणा की है। 2026 में इसके जरिए व्यापारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। लाइसेंस प्रक्रिया को आसान बनाने और टैक्स से जुड़ी समस्याओं के समाधान पर जोर रहेगा।
झुग्गियों को मिलेंगे 50 हजार पक्के मकान
2026 में झुग्गीवासियों के लिए बड़ी राहत की योजना है। सरकार का दावा है कि करीब 50,000 पक्के मकान बनाए जाएंगे। इसके लिए अलग-अलग इलाकों में प्रोजेक्ट तैयार किए जा रहे हैं।
बेड की कमी होगी दूर
दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में अस्पतालों के निर्माण का काम जारी है। नए अस्पतालों के बनने से बेड की कमी दूर होगी। स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार से मरीजों को इलाज में राहत मिलने की उम्मीद है।