भारतीय ज्ञान की प्राचीन परंपरा मेटावर्स के जरिए अब प्रत्येक बच्चे तक पहुंचेगी। बच्चे पहले आभासी वास्तविकता प्रणाली (वीआर सिस्टम) के जरिए इसको महसूस करेंगे और फिर इसकी पढ़ाई करेंगे। दिल्ली पुस्तक मेले में आईआईटी मद्रास ने इसका सजीव उदाहरण पेश किया है। यहां थ्री-डी पेंटिंग के माध्यम से लोगों को दक्षिण के वृहदीश्वर मंदिर का अनुभव कराया जा रहा है। इसे वीआर सिस्टम से भी देखने की सुविधा दी गई है। कुछ इसी प्रकार से देश के सभी प्राचीन मंदिर, धर्मग्रंथ, पुस्तकालय, वैदिक खेल जैसे अनेक विषय मेटावर्स के जरिए बच्चों को पढ़ाए जाएंगे।
विश्व पुस्तक मेले में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने हॉल संख्या चार की पहली मंजिल पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति पवेलियन (एनईपी पवेलियन) इसी सोच के तहत स्थापित किया है। लोगों को तकनीकी अभियांत्रिकी के जरिए 11वीं शताब्दी के वृहदीश्वर मंदिर, नालंदा विश्वविद्यालय का आभासी अनुभव मिल रहा है। शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक नई शिक्षा पद्धति में बच्चों तक तकनीक के माध्यम से हमारी प्राचीन ज्ञान परंपरा को कैसे लेकर जाएंगे, भारतीय ज्ञान विज्ञान परंपरा डिवीजन उसपर पूरी जानकारी लेकर आया है। नए विचार और शोध को यहां समझा जा सकता है।
किताबों के साथ विवि, आईआईटी, आईआईएम भी: पुस्तक मेले में पहली बार देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों और आईआईटी, आईआईएम ने भी सहभागिता की है। एनसीईआरटी, विज्ञान प्रसार, एआईसीटीई, आईआईटी मद्रास, भिलाई, बॉम्बे, इंदौर, आईआईएम काशीपुर, रायपुर, एनसीटीई, इग्नू, सीआईईटी, एनआईओएस जैसे दर्जन भर अन्य राष्ट्रीय शिक्षण संस्थान भी मेले का हिस्सा हैं।
बशीर बद्र-जॉन एलिया ज्यादा जोड़ते हैं
वर्षा नोएडा और इनके दोस्त प्रद्युम्न शर्मा अलीपुर से आए थे। प्रद्युम्न ने बताया कि उन्हें जॉन एलिया की शायरी बेहद पसंद है, इसके अलावा बशीर बद्र को भी वह पसंद करते हैं।
तनवीर, हरिओम व विशाल की पुस्तकें उपलब्ध
मेले में तनवीर गाजी, हरिओम, इरशाद कामिल, विशाल बाग जैसे कई और भी नाम हैं, जिनकी इस बार के पुस्तक मेले में अच्छी रचनाएं आई हैं। वाणी के यहां से इन्हें खरीदा जा सकता है। यहां अलका सरावगी की किताब गांधी और सरला देवी चौधरी बेहद पसंदीदा बनी है। गांधी के इस अध्याय पर लोगों ने सालों तक बात नहीं की। अब इस विषय पर किताब आई है, तो लोग इसे हाथो हाथ ले रहे। अंकिता जैन की मर्डर मिस्ट्री मोहल्ला सलीमबाग, अनामिका की तृण धरि ओट, लवली की लिखी वनिका, शशि थरूर की अस्मिता का संघर्ष जैसी अन्य रचनाएं हैं, जो कि पसंद की जा रही हैं।