16 साल की उम्र में हुए विवाह को रद्द करने की मांग करते हुए एक युवती ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। याची ने तर्क रखा कि विवाह के समय वह नाबालिग थी और नाबालिग का शादी मान्य नहीं है। अदालत ने दिल्ली सरकार सहित अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल एवं न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार, दिल्ली महिला आयोग, महिला के पति एवं उसके माता-पिता को नोटिस जारी कर स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न विवाह को रद्द कर दिया जाए। अदालत ने मामले की सुनवाई 12 फरवरी तय की है। याची ने तर्क रखा कि उसके माता पिता ने उसका 16 वर्ष की आयु में जबरन विवाह करवा दिया था। विवाह के बाद वह अपने पति के साथ कभी नहीं रही। इसलिए उसके विवाह को रद्द कर दिया जाए। युवती ने अदालत से अपने माता-पिता और भाई से सुरक्षा देने प्रदान करने का भी आग्रह किया है।
महिला में याचिका दाखिल कर कहा है कि वह पढ़ने-लिखने में अच्छी है और उसके माता-पिता ने वर्ष 2010 में उसका 16 वर्ष की आयु में जबरन विवाह करवा दिया था। अब वह वह स्नातक कर चुकी है और आगे पढ़ना चाहती है। वह अपने पति के साथ कभी भी नहीं रही और दांपत्य जीवन का भी निर्वाह नहीं किया। इस सब को देखते हुए उसके साथी को रद्द कर दिया जाए क्योंकि कानून नाबालिग के शादी को असंवैधानिक कहता है और बाल विवाह कानून की धारा 3 में यह अवैध घोषित किया गया है। याची की और से पेश अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर ने तर्क रखा कि बाल विवाह कानून के तहत यह विवाह गैरकानूनी है. ऐसे में दिल्ली सरकार को इस विवाह को गैरकानी ठहराने व कानून का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया जाए।